पीएम श्री और नवोदय विद्यालयों के लिए अरका जैन यूनिवर्सिटी में ‘नवाचार सत्र’ का आगाज, 120 शिक्षक-विद्यार्थी ले रहे हिस्सा

गम्हारिया (सरायकेला-खरसावां): झारखंड के शिक्षा क्षेत्र में नवाचार और रचनात्मकता को नई दिशा देने के लिए गम्हारिया स्थित आर्का जैन विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय ‘क्षेत्रीय नवाचार मेंटरिंग सत्र’ की शानदार शुरुआत हुई। 28 जनवरी से शुरू हुए इस विशेष कार्यक्रम में झारखंड के विभिन्न जिलों से आए पीएम श्री विद्यालयों और जवाहर नवोदय विद्यालयों के 120 से अधिक शिक्षक एवं विद्यार्थी शिरकत कर रहे हैं।

इनोवेशन और डिजाइन थिंकिंग पर जोर

यह कार्यक्रम एआइसीटीइ , शिक्षा मंत्रालय के इनोवेशन सेल और वाधवानी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विजन को धरातल पर उतारना है, ताकि स्कूली स्तर से ही बच्चों में समस्या-समाधान कौशल और रचनात्मक सोच विकसित की जा सके।

भविष्य के लिए उद्यमशील सोच अनिवार्य: विधिकर विशाल

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि और एआईसीटीई के नोडल हेड विधिकर विशाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा आने वाले समय की वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए छात्रों और शिक्षकों के भीतर उद्यमशील सोच और नवाचार का होना अनिवार्य है। हमें रटने की संस्कृति से निकलकर कुछ नया रचने की ओर बढ़ना होगा।इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो वाइस चांसलर डॉ. अंगद तिवारी और कुलसचिव डॉ. अमित कुमार श्रीवास्तव ने भी उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा के बीच समन्वय पर अपने विचार रखे।

सहानुभूति और विचार सृजन का पाठ

सत्र के पहले दिन वाधवानी फाउंडेशन के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को ‘डिज़ाइन थिंकिंग’ के गुर सिखाए।डॉ. अरविंद देशमुख और पल्लवी बिरादार ने सिखाया कि कैसे अपनी नवाचार यात्रा में आने वाले अंतरालों की पहचान की जाए।प्रतिभागियों को सहानुभूति और विचार सृजन के माध्यम से वास्तविक जीवन की समस्याओं का रचनात्मक समाधान ढूंढने के लिए प्रेरित किया गया।इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही विभिन्न नवाचार पहलों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।

शिक्षकों और छात्रों में नई प्रेरणा

इस कार्यशाला ने न केवल शिक्षकों में शिक्षण की नई ऊर्जा भरी है, बल्कि छात्रों को भी तकनीकी और नवाचार-आधारित समझ विकसित करने का मंच दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन विद्यालयी शिक्षा को आधुनिक कौशल से जोड़ने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित होगा।

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