
जमशेदपुर: लौहनगरी ने आज अपने एक और जांबाज सपूत को अंतिम विदाई दी। राहरगोड़ा निवासी सूबेदार प्रणय कुमार शर्मा का अंतिम संस्कार शनिवार को भुइंयाडीह बर्निंग घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ संपन्न हुआ। इस भावुक पल के गवाह सैकड़ों देशभक्त बने, जिनकी आंखों में आंसू और जुबां पर ‘भारत माता की जय’ के नारे थे।
जिस दिन होनी थी सेवानिवृत्ति, उसी दिन हुआ अंतिम संस्कार
किस्मत की क्रूरता देखिए कि सूबेदार प्रणय कुमार शर्मा का आज (31 जनवरी) ही सेना से रिटायरमेंट होना था। वे देश सेवा की लंबी पारी खेलकर घर लौटने वाले थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। रुड़की सेंटर में उनके आकस्मिक निधन ने परिवार और शहर को झकझोर कर रख दिया।
गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दी गई विदाई
सूबेदार प्रणय का पार्थिव शरीर उनके राहरगोड़ा स्थित निवास से पुलिस पीसीआर वैन की अगुआई में सेना के विशेष वाहन से घाट तक लाया गया।आर्मी यूनिट और स्टेशन हेडक्वार्टर के प्रतिनिधि लेफ्टिनेंट यू केशव एवं लेफ्टिनेंट हर्ष वर्धन ने पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। सेना की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी।अंतिम संस्कार के समय सबसे हृदयविदारक दृश्य तब दिखा जब सूबेदार प्रणय की 11 वर्षीय बेटी प्राची ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। मासूम बेटी के इस साहस को देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं।
पूर्व सैनिकों और देशभक्तों का उमड़ा जनसैलाब
पूर्व सैनिक सेवा परिषद के सदस्यों ने भी अपने साथी को नम आंखों से विदाई दी। सुशील कुमार सिंह, प्रमोद कुमार दास, रमेश शर्मा सहित अजय कुमार, राजीव कुमार और अन्य पूर्व सैनिकों ने संयुक्त रूप से रीथ चढ़ाकर उन्हें नमन किया।अंतिम यात्रा के दौरान पूरे रास्ते “भारत माता की जय”, “भारतीय सेना जिंदाबाद” और “सूबेदार प्रणय कुमार शर्मा अमर रहे” के नारों से आसमान गूंजता रहा।
समाज के लिए अपूरणीय क्षति
सूबेदार प्रणय कुमार शर्मा का निधन न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे जमशेदपुर और भारतीय सेना के लिए एक बड़ी क्षति है। उनके अनुशासित जीवन और देश के प्रति समर्पण को शहर हमेशा याद रखेगा।
