जमशेदपुर। टाटा स्टील के पूर्व ठेका मजदूरों ने अपनी वर्षों पुरानी मांगों को लेकर एक बार फिर प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। एसोसिएशन ऑफ आदिवासी सोसाइटीज, एस.जी. पटेल एवं आदिवासी वेलफेयर सोसाइटी से जुड़े मजदूरों ने उपायुक्त को मांग पत्र सौंपकर लंबित मामलों के समाधान की मांग की।
1981 से 1990 तक उत्पादन बनाए रखने में निभाई अहम भूमिका
मजदूरों का कहना है कि वर्ष 1981 के आपातकालीन दौर से लेकर 1990 तक उन्होंने दिन-रात मेहनत कर टाटा स्टील के उत्पादन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका दावा है कि उस कठिन समय में आदिवासी, मूलवासी और स्थानीय मजदूरों ने कंपनी का साथ देकर संयंत्र का संचालन सुचारू रूप से जारी रखने में अहम भूमिका निभाई।
1990 में हटाए जाने का आरोप, बकाया भुगतान आज तक नहीं
संघ के अनुसार वर्ष 1990 में स्थायीकरण की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में ठेका मजदूरों को बिना पूर्व सूचना के कार्य से हटा दिया गया। मजदूरों का आरोप है कि अक्टूबर 1990 तक का वेतन, महंगाई भत्ता (डीए) तथा बेसिक वेतन से संबंधित बकाया आज तक नहीं मिला है।मजदूरों का कहना है कि स्थायी नौकरी की उम्मीद में कई श्रमिकों का निधन हो चुका है, जबकि उनके आश्रित आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
आश्रितों के लिए आर्थिक पैकेज और रोजगार की मांग
संघ ने मांग की है कि स्थायीकरण से वंचित कर्मचारियों और उनके आश्रितों को उचित आर्थिक पैकेज उपलब्ध कराया जाए। साथ ही उनके पुत्र-पुत्रियों को प्रशिक्षण देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
36 वर्षों से जारी है आंदोलन
मजदूर नेताओं ने बताया कि वे पिछले 36 वर्षों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। इस दौरान टाटा स्टील जनरल ऑफिस गेट के सामने नियमित साप्ताहिक बैठक और धरना आयोजित किया जाता रहा है।संघ का कहना है कि प्रबंधन के निर्देश पर तीन बार सभी संबंधित दस्तावेज और मजदूरों की सूची जमा की गई तथा कई दौर की वार्ता भी हुई, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। मजदूरों ने टाटा स्टील प्रबंधन से इस लंबे समय से लंबित मामले का जल्द न्यायपूर्ण समाधान करने की मांग की है।
