रांची: झारखंड हाई कोर्ट में राज्य के ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट (ओपन जेल) में कैदियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और इसकी नियमित निगरानी से जुड़े मामले में गुरुवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आलोक में मामले की सुनवाई की।सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य के चार सेंट्रल जेलों में ओपन बैरक संचालित करने की अनुमति कैबिनेट से मिल चुकी है।
तीन नवंबर तक कोर्ट में दाखिल होगी त्रैमासिक रिपोर्ट
राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि ओपन जेल के संचालन, वहां उपलब्ध सुविधाओं और इसके विस्तार से संबंधित त्रैमासिक रिपोर्ट हाई कोर्ट में दाखिल की जाएगी।अदालत ने रिपोर्ट तीन नवंबर तक प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए पांच नवंबर की तारीख निर्धारित की है।
हजारीबाग में 32 एकड़ सरकारी जमीन चिह्नित
इस मामले की पूर्व सुनवाई में राज्य सरकार ने हाई कोर्ट को बताया था कि ओपन जेल के विस्तार के लिए हजारीबाग में 32 एकड़ सरकारी जमीन चिह्नित की गई है। इस जमीन पर ओपन जेल के विस्तार का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा गया है।इसके अलावा महिला कैदियों के लिए ओपन जेल में विशेष व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
रांची समेत चार सेंट्रल जेल में अस्थायी ओपन जेल की व्यवस्था
हाई कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है कि जब तक स्थायी सेंट्रल ओपन जेल का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक रांची, हजारीबाग, दुमका सहित चार सेंट्रल जेलों में अस्थायी तौर पर ओपन जेल की व्यवस्था की जाए।राज्य में ओपन बैरक के संचालन की अनुमति मिलने के बाद इस व्यवस्था को लागू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है।
कैदियों को मुख्यधारा से जोड़ना है ओपन जेल का उद्देश्य
ओपन जेल की व्यवस्था का उद्देश्य कैदियों को पारंपरिक बंद जेल व्यवस्था से अलग नियंत्रित और अपेक्षाकृत खुले वातावरण में रखकर पुनर्वास के लिए तैयार करना है। इसके माध्यम से कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने पर जोर दिया जाता है।सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को ओपन जेल की व्यवस्था और उसकी निगरानी के लिए गृह विभाग के स्तर पर कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है।
जिम, चिकित्सा और बेहतर भोजन जैसी सुविधाओं पर जोर
ओपन जेल में कैदियों को आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। इनमें जिम, चिकित्सा सुविधा, बेहतर भोजन और अन्य जरूरी सुविधाएं शामिल हैं।गृह विभाग के स्तर पर गठित कमेटी को ओपन जेलों की नियमित निगरानी करने के साथ-साथ वहां कैदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की समीक्षा भी करनी है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाई कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य में ओपन जेल से संबंधित व्यवस्थाओं को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की है।सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित हाई पावर कमेटी में झारखंड की तत्कालीन गृह सचिव वंदना दादेल का नाम भी नामित किया गया है। अब हाई कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई पांच नवंबर को होगी।
