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जमशेदपुर: रॉयल्टी कटौती और बिटुमेन की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर कोल्हान क्षेत्र के ठेकेदारों में नाराजगी बढ़ रही है। इन समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर रविवार को निर्मल गेस्ट हाउस में कोल्हान कॉन्ट्रैक्टर्स संघ के बैनर तले ठेकेदारों की बैठक हुई। इसमें 100 से अधिक ठेकेदारों ने हिस्सा लिया और निर्माण कार्यों के दौरान हो रही आर्थिक परेशानियों पर चर्चा की।संघ के प्रतिनिधि विकास सिंह ने बताया कि बैठक में सरकारी निर्माण कार्यों के भुगतान के दौरान रॉयल्टी कटौती और निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों से जुड़ी समस्याओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
दोबारा रॉयल्टी कटौती से अतिरिक्त आर्थिक बोझ की चिंता
ठेकेदारों का कहना है कि खनिजों की खरीद के समय वे पहले ही रॉयल्टी का भुगतान कर चुके होते हैं। इसके बावजूद सरकारी निर्माण कार्यों के भुगतान के दौरान दोबारा रॉयल्टी कटौती किए जाने की आशंका बनी रहती है। इससे ठेकेदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है और निर्माण कार्यों की लागत प्रभावित होती है।बैठक में इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और रॉयल्टी कटौती से जुड़ी समस्याओं का स्पष्ट समाधान निकालने की मांग की गई।
एसओआर और बाजार दरों के अंतर से बढ़ रही परेशानी
ठेकेदारों ने बिटुमेन की लगातार बढ़ती कीमतों पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि बाजार में निर्माण सामग्री की कीमतें बढ़ रही हैं, जबकि निर्धारित एसओआर दरों और बाजार की वास्तविक कीमतों के बीच अंतर बना हुआ है।ऐसे में निर्धारित दरों पर सरकारी निर्माण कार्यों को पूरा करना मुश्किल होता जा रहा है। ठेकेदारों ने बढ़ती लागत के अनुरूप दरों में सुधार करने की जरूरत बताई, ताकि निर्माण कार्यों को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाया जा सके।
2 नवंबर को मंत्री दीपक बिरुआ से मिलेंगे ठेकेदार
समस्याओं को राज्य सरकार के समक्ष रखने और समाधान की मांग को लेकर 2 नवंबर को दोपहर 1:30 बजे जमशेदपुर के सर्किट हाउस में बैठक निर्धारित की गई है। इसमें झारखंड सरकार के मंत्री दीपक बिरुआ और कोल्हान क्षेत्र के अन्य विधायकों के साथ संघ के प्रतिनिधि शामिल होंगे।बैठक में रॉयल्टी कटौती की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने, बिटुमेन की बढ़ती कीमतों के अनुरूप दरों में सुधार करने और वर्तमान एसओआर तथा बाजार दरों के बीच अंतर दूर करने जैसे मुद्दे उठाए जाएंगे।
निर्माण कार्यों को सुचारु रखने की मांग
कोल्हान कॉन्ट्रैक्टर्स संघ को उम्मीद है कि मंत्री और जनप्रतिनिधियों के साथ होने वाली बैठक में ठेकेदारों की समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस पहल होगी। संघ का कहना है कि न्यायसंगत और व्यावहारिक व्यवस्था लागू होने से ठेकेदारों को राहत मिलेगी और राज्य में चल रहे विकास एवं निर्माण कार्यों को भी सुचारु रूप से पूरा करने में मदद मिलेगी।
