मझगांव में रसोइया और संयोजिकाओं ने न्यूनतम वेतन और बीमा की मांग को लेकर जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल, स्कूलों में मिड-डे मील सेवा ठप

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मझगांव: अपनी लंबित और जायज मांगों को लेकर मझगांव, कुमारडुंगी, मंझारी और हाटगम्हारिया प्रखंड की रसोइया व संयोजिकाएं अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। बुधवार को जिला संघ अध्यक्ष जानकी पिंगुवा के नेतृत्व में सैकड़ों रसोइयों ने पीएमश्री प्लस टू उच्च विद्यालय मझगांव के गुरु गोष्ठी कक्ष परिसर के समक्ष जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।

18 फरवरी से जारी है अनिश्चितकालीन हड़ताल

अपनी मांगों को लेकर ये रसोइयां बीते 18 फरवरी से ही अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसके कारण क्षेत्र के प्राथमिक, मध्य और उत्क्रमित उच्च विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) योजना बुरी तरह प्रभावित हो रही है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, हड़ताल जारी रहेगी।

रसोइया व संयोजिकाएं ने रखा सात सूत्री मांग

रसोइया व संयोजिकाएं ने सात सूत्री मांगों को रखा जिसमें मुख्य रूप सेसभी रसोइया और संयोजिकाओं को सम्मानजनक न्यूनतम वेतन लागू किया जाए। संयोजिका एवं अध्यक्ष को भी रसोइया की तर्ज पर मानदेय से जोड़ा जाए। जब तक स्थायी नियमावली नहीं बनती, 60 साल की उम्र की बाध्यता समाप्त हो या सेवानिवृत्ति पर परिवार के किसी सदस्य को नौकरी मिले। कार्य के दौरान दुर्घटना या मृत्यु होने पर 10 लाख रुपये का निशुल्क बीमा और आश्रितों को आर्थिक सहायता दी जाए।सभी कर्मियों को पेंशन स्कीम, ईपीएफ और ग्रेच्युटी का लाभ मिले। 2021 के बाद से बकाया एप्रन कैप और साल में दो सेट साड़ी दी जाए। पुरानी रसोइयों की अनदेखी कर किसी भी विद्यालय में नई बहाली न की जाए।

बीईईओ ने की मुलाकात

हड़ताल की सूचना मिलने पर प्रभारी बीईईओ राजेश पासवान ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं पर चर्चा की। उन्होंने रसोइयों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों से जिला प्रशासन और राज्य सरकार को अवगत करा दिया जाएगा। हालांकि, रसोइयों ने साफ कर दिया है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगी।

मौके पर उपस्थित रहे गणमान्य सदस्य

इस अवसर पर जिला कोषाध्यक्ष फुलमती पिंगुवा, मझगांव प्रखंड से सुमति तिरिया, सुकरमणी चातार, कुमारडुंगी से निर्मला सिंकु, अन्नाय सोय, मंझारी से सुमित्रा बिरुवा और हाटगम्हारिया से मीता सिंकु समेत भारी संख्या में रसोइया-संयोजिकाएं मौजूद थीं।

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