
जमशेदपुर: लौहनगरी के औद्योगिक और व्यावसायिक विकास की जीवनरेखा मानी जाने वाली धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना में हो रही देरी के खिलाफ व्यापारियों का आक्रोश फूट पड़ा है। सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा शनिवार को बिस्टुपुर पोस्टल पार्क के समीप एक विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया।
चैंबर अध्यक्ष मानव केडिया का नेतृत्व: सरकार से स्पष्ट कार्ययोजना की मांग
चैंबर के अध्यक्ष मानव केडिया के नेतृत्व में जुटे व्यवसायियों ने हुंकार भरते हुए कहा कि जमशेदपुर जैसे बड़े औद्योगिक शहर के लिए एयरपोर्ट अब विलासिता नहीं, बल्कि जरूरत है। केडिया ने कहा सरकार को एयरपोर्ट निर्माण को लेकर अपनी स्थिति और कार्ययोजना स्पष्ट करनी चाहिए। सालों से शिलान्यास का पत्थर लगा है, लेकिन धरातल पर एक ईंट भी नहीं रखी गई।
2019 में हुआ था शिलान्यास, पर ‘कांटों’ भरी है राह
धालभूमगढ़ एयरपोर्ट का इतिहास घोषणाओं और अड़चनों से भरा रहा है। विधानसभा चुनाव 2019 से पूर्व इस प्रोजेक्ट का भव्य शिलान्यास हुआ था।नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शुरुआती काम के लिए 100 करोड़ रुपये का आवंटन भी कर दिया था।पहले जमीन पर सेना के दावे के कारण मामला लटका। जब वह सुलझा, तो वन विभाग ने अड़ंगा लगा दिया।
वन विभाग की रिपोर्ट ने फंसाया पेंच
प्रोजेक्ट के रुकने की मुख्य वजह वन विभाग की दो अलग-अलग रिपोर्ट हैं।पहले इस क्षेत्र को हाथियों का गलियारा बताया गया।बाद में हजारों पेड़ों को काटने की रिपोर्ट देकर पर्यावरण क्लीयरेंस की राह में कांटे बिछा दिए गए।
विकास के लिए हवाई कनेक्टिविटी अनिवार्य
सिंहभूम चैंबर का तर्क है कि टाटा स्टील, टाटा मोटर्स और दर्जनों सहायक उद्योगों वाले इस शहर के व्यापारियों को कोलकाता या रांची पर निर्भर रहना पड़ता है। धालभूमगढ़ एयरपोर्ट शुरू होने से कोल्हान क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। धरने के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार, दोनों से वन विभाग की अड़चनों को दूर कर निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने की मांग की गई है।
