
जमशेदपुर: कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम में एक बार फिर पानी की किल्लत मरीजों और उनके परिजनों के लिए मुसीबत बन सकती है। मार्च की शुरुआत के साथ ही तापमान में बढ़ोतरी होने लगी है, जिसका सीधा असर अस्पताल की जल आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ा है।
बोरिंग का जलस्तर गिरा, बढ़ी निर्भरता
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, गर्मी बढ़ने के साथ ही परिसर में स्थित बोरिंग से पानी आना कम हो गया है। जमीन के नीचे जलस्तर गिरने के कारण अस्पताल की मुख्य टंकियां समय पर नहीं भर पा रही हैं। ऐसे में अब अस्पताल पूरी तरह से बाहरी जलापूर्ति (टैंकरों) पर निर्भर होता दिख रहा है।
प्राचार्य का सख्त निर्देश: रोज चाहिए 10 टंकी पानी
मरीजों को होने वाली असुविधा को देखते हुए एमजीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए थे कि अस्पताल में प्रतिदिन सुबह-शाम मिलाकर कम से कम 10 टैंकर (टंकी) पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
एक बार फिर जारी हुआ अल्टीमेटम
पानी की कमी की शिकायतों के बाद संबंधित विभाग और वेंडर्स को एक बार फिर कड़ा निर्देश दिया गया है। प्रशासन ने साफ कहा है कि किसी भी हाल में पानी की सप्लाई कम नहीं होनी चाहिए। अस्पताल के शौचालय, ऑपरेशन थिएटर और अन्य वार्डों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए पानी की निरंतर उपलब्धता अनिवार्य है।
मरीजों की बढ़ सकती है परेशानी
अगर टैंकरों की संख्या में सुधार नहीं हुआ, तो भर्ती मरीजों और उनके साथ आने वाले तीमारदारों को पीने और दैनिक कार्यों के लिए पानी बाहर से खरीदना पड़ सकता है। अस्पताल प्रबंधन अब वैकल्पिक व्यवस्थाओं और नए बोरिंग की संभावनाओं पर भी विचार कर रहा है ताकि भीषण गर्मी (अप्रैल-मई) आने से पहले संकट को टाला जा सके।
