
जमशेदपुर: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार एमजीएम अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सोपोडेरा निवासी एक मरीज के अस्पताल से रहस्यमयी ढंग से गायब होने और बाद में साकची स्थित पुराने कोर्ट के पास मिलने की घटना ने प्रबंधन की पोल खोल दी है। इस घटना के बाद भाजपा नेता विमल बैठा ने अधीक्षक से मुलाकात कर अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए ‘ड्रेस कोड’ लागू करने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
बागबेड़ा निवासी महेश प्रमाणिक ने बताया कि उनके भाई अरुण प्रमाणिक खाना बनाने के दौरान जल गए थे। उन्हें 8 तारीख को एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 9 तारीख की रात करीब 11 से 12 बजे के बीच अरुण अचानक अपने वार्ड से गायब हो गए।परिजनों ने रात भर पूरे अस्पताल परिसर में उन्हें ढूंढा, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद एमजीएम थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई।काफी खोजबीन के बाद अरुण प्रमाणिक साकची के पुराने कोर्ट परिसर के पास बदहवास हालत में बरामद हुए।
500 करोड़ का अस्पताल, पर सुरक्षा शून्य: विमल बैठा
मरीज के परिजनों के साथ अस्पताल के उप-अधीक्षक को निवेदन पत्र सौंपते हुए विमल बैठा ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा 500 करोड़ की लागत से बन रहे इस भव्य अस्पताल में मरीजों के लिए एक साधारण ड्रेस कोड तक उपलब्ध नहीं है। बिना ड्रेस कोड के कोई भी मरीज चुपके से अस्पताल से बाहर निकल जाता है और उसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। अगर किसी मरीज की दिमागी हालत ठीक न हो, तो उसे ढूंढना नामुमकिन हो जाएगा।
परिजनों ने जताई नाराजगी
महेश प्रमाणिक ने कहा कि एमजीएम जैसे अस्पताल से मरीज का इस तरह गायब हो जाना प्रशासन की बड़ी लापरवाही है। उन्होंने मांग की है कि जल्द से जल्द ड्रेस कोड व्यवस्था लागू की जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह की मानसिक प्रताड़ना न झेलनी पड़े।
