
जमशेदपुर: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते युद्ध के तनाव के बीच भारत में रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर फैली आशंकाओं पर भारत गैस एजेंसी के मैनेजर रवि रंजन झा ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने ग्राहकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। हालांकि, सुरक्षा और समान वितरण के लिहाज से प्रशासन ने बुकिंग के नियमों में कुछ बदलाव किए हैं।
बुकिंग में 25 दिनों का ‘लॉक-इन’ पीरियड

मैनेजर रवि रंजन झा ने बताया कि जिला प्रशासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब एक सिलेंडर की बुकिंग के बाद ग्राहक 25 दिनों के बाद ही दूसरी बुकिंग कर सकेंगे। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि गैस की जमाखोरी न हो और सभी जरूरतमंद परिवारों को सिलेंडर मिल सके।
बुकिंग का आंकड़ा हुआ दोगुना, सर्वर भी पड़ा धीमा
युद्ध की खबरों के कारण ग्राहकों में डर का माहौल है, जिससे बुकिंग में भारी उछाल आया है। सामान्य दिनों में जहां प्रतिदिन 250 से 350 बुकिंग होती थी, वहीं अब यह आंकड़ा 500 के पार पहुंच गया है।बीपीसीएल का सर्वर डाउन होने के कारण मोबाइल ऐप से बुकिंग में दिक्कत आ रही है। इस वजह से लोग गैस एजेंसी पर भौतिक रूप से पहुंच रहे हैं, जिससे कार्यालयों में भीड़ बढ़ गई है।
“स्टॉक की कोई कमी नहीं, पैनिक बुकिंग से बचें”
मैनेजर ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि चाहे BPCL हो, HPCL हो या इंडेन , सभी कंपनियों के पास पर्याप्त मात्रा में गैस उपलब्ध है।”मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण कच्चे माल के आने में थोड़ी कठिनाई जरूर है, लेकिन हमारे पास स्टॉक की कमी नहीं है। हम लगातार जिला प्रशासन के संपर्क में हैं। लोग डर के मारे अधिक बुकिंग न करें।”
“25 दिन का इंतजार और युद्ध का साया”: आम आदमी की रसोई पर दोहरी मार
नए नियमों और 25 दिनों के ‘लॉक-इन’ पीरियड की खबर सुनते ही स्थानीय लोगों में चिंता की लहर दौड़ गई है। आम जनता का कहना है कि घरेलू गैस कोई विलासिता नहीं, बल्कि रोजमर्रा की बुनियादी जरूरत है। ऐसे में बुकिंग की समय सीमा तय करना मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है।
स्थानीय लोगों ने उठाए ये सवाल

गृहिणियों का कहना है कि बड़े परिवारों में एक सिलेंडर अक्सर 20 से 22 दिनों में ही खत्म हो जाता है। ऐसे में 25 दिनों के बाद बुकिंग का नियम लागू होने से कम से कम 3-5 दिन बिना गैस के गुजारने पड़ेंगे।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण लोगों को डर है कि आने वाले समय में स्थितियां और बिगड़ सकती हैं। स्थानीय निवासी ने कहा, “अगर युद्ध लंबा खिंचा और गैस की किल्लत बढ़ी, तो 25 दिन का यह नियम हमारे चूल्हे ठंडे कर देगा।”

लोगों को डर है कि इस पाबंदी के कारण बाजार में गैस की ब्लैक मार्केटिंग (कालाबाजारी) बढ़ सकती है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग को अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।

नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि 25 दिनों की इस पाबंदी पर पुनर्विचार किया जाए या कम से कम उन परिवारों को राहत दी जाए जिनके घर में सदस्यों की संख्या अधिक है।
