
दुमका: राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर ने झारखंड की कानून व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है और इसमें सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में अब तक झारखंड राज्य महिला आयोग का गठन नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है।शनिवार को दुमका के समाहरणालय सभागार में आयोजित महिला जन सुनवाई कार्यक्रम में उन्होंने कुल 24 मामलों की सुनवाई की और स्थानीय प्रशासन तथा पुलिस को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
राज्य महिला आयोग के गठन की जरूरत
मीडिया से बातचीत में विजया किशोर रहाटकर ने कहा कि झारखंड में कई वर्षों से राज्य महिला आयोग का गठन नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वे राज्यपाल और मुख्यमंत्री से बातचीत की है और पत्र लिखकर भी जल्द गठन की मांग की है।उन्होंने कहा कि महिला आयोग के गठन से राज्य की महिलाओं को त्वरित न्याय, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जा सकता है।
जन सुनवाई: दहेज हत्या के मामलों की अधिकता
जन सुनवाई में सामने आए ज्यादातर मामले दहेज और दहेज हत्या से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि राज्य में दहेज से संबंधित मामलों की संख्या चिंताजनक है और सरकार की जिम्मेदारी है कि इन मामलों में कानून का सख्ती से पालन कराया जाए।
एसिड अटैक और हत्या की धमकी का मामला
जन सुनवाई के दौरान एक ऐसा मामला भी सामने आया, जिसमें दो लड़कियों को एसिड अटैक और हत्या की धमकी दी जा रही थी।विजय रहाटकर ने कहा कि ऐसी घटनाएं बेहद गंभीर हैं और कानून-व्यवस्था को और सख्त बनाने की जरूरत है। उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया कि दोनों लड़कियों को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाए, क्योंकि वे डर के कारण अपने घर से बाहर नहीं निकल पा रही हैं।
कानून व्यवस्था में सुधार की जरूरत
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि महिलाओं से जुड़े मामलों में प्रशासन और पुलिस को अतिसंवेदनशील और सख्त रवैये अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि झारखंड में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए कानून व्यवस्था को और मजबूत करना जरूरी है।
