जमशेदपुर: अलग राज्य की लड़ाई लड़ने वाले झारखंड आंदोलनकारियों ने सोमवार को मान-सम्मान और पहचान की मांग को लेकर उपायुक्त कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों का आरोप है कि राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन उन्हें प्रमाण पत्र, सम्मान पत्र और प्रतीक चिन्ह प्रदान करने में शिथिलता बरत रहा है।
संकल्प संख्या 1938 के अनुपालन की मांग
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे आंदोलनकारी पुष्कर महतो ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा सरकार द्वारा जारी संकल्प संख्या 1938 (दिनांक 30 अप्रैल 2021) के तहत सभी चिन्हित आंदोलनकारियों को राजकीय मान-सम्मान के साथ सम्मानित करना अनिवार्य है।गृह विभाग के अपर सचिव द्वारा पत्र संख्या 3108 के माध्यम से सभी उपायुक्तों को निर्देश दिया गया था, लेकिन जिले में इसका पालन नहीं होना सीधे तौर पर राज्यादेश का उल्लंघन है।
“सम्मान मिलने से पहले ही कई साथियों का हुआ निधन”
आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने अत्यंत भावुक और तल्ख लहजे में अपनी व्यथा साझा की। उन्होंने बताया कि सरकारी फाइलों और प्रशासनिक सुस्ती के कारण कई आंदोलनकारी बिना सम्मान पाए ही दुनिया से विदा हो गए, जो राज्य के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।वक्ताओं ने कहा कि संवैधानिक मूल्यों का पालन होने से ही संघीय व्यवस्था की गरिमा बनी रहती है।आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि प्रशासनिक अधिकारियों की यह लापरवाही भारतीय दंड संहिता की धारा 166, 166A एवं 188 के तहत कार्रवाई योग्य अपराध है।
जल्द प्रक्रिया शुरू करने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सभी पात्र आंदोलनकारियों को चिन्हित कर उन्हें विधिवत सम्मानित किया जाए।प्रमाण पत्र और प्रतीक चिन्ह वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित बनाया जाए।आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल प्रतीक चिन्ह की बात नहीं है, बल्कि यह उन संघर्षों की साख और गरिमा का सवाल है जिसके दम पर झारखंड राज्य का उदय हुआ है।
