रांची/जमशेदपुर : झारखंड की सत्ताधारी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा अब पड़ोसी राज्यों में भी अपनी राजनीतिक जड़ें जमाने की तैयारी में है। पार्टी ने आगामी असम विधानसभा चुनाव को लेकर एक बड़ा और रणनीतिक फैसला लेते हुए राज्य की 21 महत्वपूर्ण सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की आधिकारिक घोषणा कर दी है।
राष्ट्रीय फलक पर पहचान बनाने की कवायद
पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता कुणाल सारंगी ने इस संबंध में विस्तृत बयान जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि झामुमो अब केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक उपस्थिति को सशक्त बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। असम में पिछले काफी समय से झामुमो के संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जा रहा है।पार्टी असम के स्थानीय और ज्वलंत मुद्दों, विशेषकर आदिवासी और श्रमिक वर्ग के हितों को प्राथमिकता देते हुए चुनाव मैदान में उतर रही है। सारंगी ने पूर्ण विश्वास जताया कि असम की जनता झामुमो की नीतियों और जल-जंगल-जमीन की विचारधारा पर भरोसा जताएगी।
21 सीटों पर फोकस, असम के समीकरण बदलेंगे?
असम के चाय बागान क्षेत्रों और आदिवासी बाहुल्य इलाकों में झारखंड मूल के लोगों की बड़ी आबादी है। झामुमो का इन 21 सीटों पर चुनाव लड़ना वहां के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को दिलचस्प बना सकता है।पार्टी ने उन सीटों को चिन्हित किया है जहाँ झामुमो की विचारधारा और सांगठनिक पकड़ पहले से मौजूद है। कुणाल सारंगी ने कहा कि झामुमो का प्रदर्शन इस बार सबको चौंका देगा और पार्टी एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरेगी।
क्षेत्रीय से राष्ट्रीय की ओर झामुमो
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओडिशा और बंगाल के बाद अब असम में 21 सीटों पर दांव लगाकर झामुमो खुद को एक क्षेत्रीय दल से ऊपर उठाकर एक बड़ी राष्ट्रीय ताकत के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
“असम चुनाव हमारे लिए केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि हमारी विचारधारा के विस्तार का मंच है। हम वहां के लोगों की आवाज बनेंगे और मजबूती के साथ चुनाव लड़ेंगे।” — कुणाल सारंगी, प्रवक्ता (झामुमो)
