जमशेदपुर: मजदूर दिवस पर एमजीएम अस्पताल के सफाईकर्मियों का प्रदर्शन, 30 साल की सेवा के बाद भी स्थायीकरण की गुहार

जमशेदपुर : एमजीएम अस्पताल के अस्थाई सफाई कर्मचारियों ने शुक्रवार को ‘मजदूर दिवस’ के अवसर पर अपनी मांगों को लेकर अस्पताल परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का आरोप है कि दशकों की सेवा और जान जोखिम में डालकर काम करने के बावजूद सरकार और प्रबंधन उनके भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है।

20 से 30 वर्षों का अनुभव, फिर भी ‘अस्थाई’

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एमजीएम अस्पताल अस्थाई सफाई कर्मचारी संघ के सचिव रवि नामता ने कर्मचारियों की व्यथा साझा की। उन्होंने बताया कि अस्पताल में कार्यरत लगभग 200 कर्मचारी ऐसे हैं जो पिछले 20 से 30 वर्षों से लगातार अपनी सेवा दे रहे हैं, लेकिन आज भी उनकी नौकरी स्थाई नहीं हो सकी है।

“कोरोना काल की सेवा भी भूल गई सरकार”

कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में कुछ प्रमुख तर्क रखे। कर्मचारियों ने याद दिलाया कि कोरोना महामारी के दौरान, जब लोग घरों से निकलने में डर रहे थे, तब इन सफाईकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर अस्पताल को संक्रमण मुक्त रखा।उन्हें उम्मीद थी कि उनकी निष्ठा और कठिन समय में दी गई सेवा को देखते हुए सरकार उन्हें नियमित करेगी, लेकिन उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया।संघ का कहना है कि उन्होंने कई बार शासन-प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित कराया, लेकिन हर बार उनकी मांगों को अनसुना कर दिया गया।

“अब आर-पार की लड़ाई” — कर्मचारियों की चेतावनी

सफाईकर्मियों ने स्पष्ट किया कि 200 परिवारों का भविष्य अधर में लटका हुआ है और सरकार की बेरुखी से उनमें भारी आक्रोश (मर्माहत) है। इस प्रदर्शन के माध्यम से कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ पुरजोर विरोध दर्ज कराया है।संघ ने संकेत दिया है कि यदि जल्द ही उनके स्थाईकरण की प्रक्रिया पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तीव्र करेंगे, जिससे अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

अस्पताल प्रबंधन की चुप्पी

फिलहाल इस प्रदर्शन और कर्मचारियों की मांगों पर एमजीएम अस्पताल प्रबंधन या जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

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