जमशेदपुर: एमजीएम अस्पताल अब केवल सामान्य बीमारियों के इलाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहाँ जल्द ही बड़े और आधुनिक चिकित्सा विभागों की शुरुआत होने जा रही है। इस ऐतिहासिक पहल के बाद कोल्हान (पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां) के मरीजों को न्यूरो और कार्डियो जैसे गंभीर इलाजों के लिए दूसरे राज्यों या महंगे प्राइवेट अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
इन 7 प्रमुख विभागों की शुरू होगी ओपीडी
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, जिन सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा रहा है, उनमें मुख्य रूप से शामिल है न्यूरोसर्जरी,नेफ्रोलॉजी – किडनी रोग),ऑन्को सर्जरी एवं ऑन्कोलॉजी कैंसर का इलाज व सर्जरी, हृदय रोग)प्लास्टिक सर्जरी।
रांची-कोलकाता की दौड़ से मिलेगी मुक्ति: अधीक्षक
एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बलराम झा ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया “इन सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं के शुरू होने से हमारे क्षेत्र के मरीजों को अब बेहतर और उच्च स्तरीय इलाज के लिए रांची, कोलकाता या कटक जैसे शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। मरीजों को एक ही छत के नीचे नियमित परामर्श और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में इलाज की सुविधा मिलेगी।”
मरीजों के रोजाना बचेंगे ₹2 लाख तक; कंसल्टेंसी होगी मुफ्त
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, कोल्हान क्षेत्र से हर दिन लगभग 200 मरीज इन गंभीर बीमारियों के परामर्श के लिए निजी अस्पतालों का रुख करते हैं।प्राइवेट क्लीनिकों में केवल डॉक्टर से मिलने (कंसल्टेंसी फीस) के लिए मरीजों को 800 से 1000 रुपये तक चुकाने पड़ते हैं। एमजीएम में यह ओपीडी सेवा पूरी तरह निःशुल्क होगी। इससे कोल्हान के मरीजों के सामूहिक रूप से लगभग 1.60 लाख से 2 लाख रुपये प्रतिदिन की बचत होगी।
जांच के लिए भी बाहर जाने की जरूरत नहीं
मरीजों की सहूलियत को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने जांच की व्यवस्था को भी इनडोर ही रखने का फैसला किया है।सुपर स्पेशियलिटी ओपीडी के साथ ही अस्पताल परिसर के भीतर अत्याधुनिक पैथोलॉजी (ब्लड-यूरिन जांच) और रेडियोलॉजी (एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई) की सुविधाएं मुस्तैद की जा रही हैं।इससे मरीजों को डॉक्टर की पर्ची लेकर किसी निजी डायग्नोस्टिक सेंटर के चक्कर नहीं काटने होंगे।एमजीएम अस्पताल में सुपर स्पेशियलिटी ओपीडी सेवाओं की शुरुआत कोल्हान के सरकारी स्वास्थ्य ढांचे के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित होगी। स्वास्थ्य लाभ के साथ-साथ यह कदम आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
