जमशेदपुर : लौहनगरी में पिछले चार दिनों से ईंधन को लेकर मचा हाहाकार रविवार को पूरी तरह शांत हो गया। कल तक जिन पेट्रोल पंपों पर सुबह से लेकर देर रात तक वाहनों की किलोमीटर लंबी कतारें लगी थीं और तेल लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा था, आज वहां का नजारा बिल्कुल उलट है। स्थिति यह है कि अब पंप पूरी तरह वीरान दिख रहे हैं और कर्मचारी ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने दिया था बचत का बयान
इस पूरे संकट की शुरुआत पिछले सप्ताह हुई थी, जब देश के प्रधानमंत्री द्वारा पेट्रोलियम पदार्थों की बचत को लेकर एक बयान दिया गया था। इस बयान के बाद पूरे देश सहित जमशेदपुर में भी वाहन मालिकों के बीच यह अफवाह फैल गई कि आने वाले दिनों में तेल की किल्लत हो सकती है। इसके बाद शहरवासियों में पेट्रोल-डीजल स्टॉक करने की होड़ मच गई। लगातार चार दिनों तक स्थिति यह रही कि लोग अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराने और डिब्बों में तेल भरने के लिए पंपों पर टूट पड़े।
चार दिन किया ओवरटाइम, आज बैठे-बैठे बोर हो रहे कर्मचारी
लगातार चार दिनों तक मचे इस हाहाकार को संभालने के लिए पेट्रोल पंप के कर्मचारियों को दिन-रात एक करना पड़ा था। भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कर्मचारियों ने लगातार ओवरटाइम (अतिरिक्त समय) ड्यूटी की। रविवार को स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई। पैनिक खत्म होते ही भीड़ गायब हो गई और कर्मचारी पंपों पर बैठे-बैठे बोर होते नजर आए। कइयों का कहना है कि चार दिनों की भारी मानसिक और शारीरिक थकान के बाद आज जाकर उन्हें राहत मिली है।
दिनभर में पहुंचे महज 30 से 50 वाहन
पंप संचालकों के अनुसार, रविवार को बिक्री में भारी गिरावट देखी गई। जो लोग डर के मारे पहले ही जरूरत से ज्यादा तेल ले चुके थे, वे आज पंपों की तरफ नहीं भटके। आलम यह रहा कि शहर के कई प्रमुख पंपों पर दिनभर में बमुश्किल 30 से 50 वाहन ही तेल भरवाने पहुंचे। प्रशासन और उपायुक्त द्वारा लगातार की गई अपीलों और जमाखोरी पर कार्रवाई की चेतावनी का भी असर हुआ, जिससे जनता का डर पूरी तरह खत्म हो गया।
