झारखंड में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराने की आशंका: स्टाइफेंड वृद्धि को लेकर जूनियर डॉक्टरों का हल्ला बोल, 6 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

जमशेदपुर/रांची: झारखंड के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। राज्यभर के मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत जूनियर डॉक्टर अपने स्टाइफेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर आंदोलन की राह पर हैं। जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज समेत राज्य के लगभग सभी बड़े अस्पतालों में डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को काला बिल्ला लगाकर विरोध प्रदर्शन करने का अंतिम दिन था, जिसके बाद अब डॉक्टरों ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।

6 अप्रैल से ठप हो सकती हैं सेवाएं

जूनियर डॉक्टरों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो 6 अप्रैल 2026 से वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। पिछले कई दिनों से डॉक्टर अस्पताल में काला बिल्ला लगाकर काम कर रहे थे, ताकि सरकार तक अपनी बात पहुँचा सकें।डॉक्टरों का कहना है कि 6 अप्रैल से ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं समेत तमाम कार्यों का बहिष्कार किया जा सकता है, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

क्या है जूनियर डॉक्टरों की प्रमुख मांग?

आंदोलनरत डॉक्टरों का तर्क है कि झारखंड में मिलने वाला स्टाइफेंड अन्य पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी कम है। डॉक्टरों के अनुसार, वे दिन-रात अपनी सेवाएं देते हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाला मानदेय बेहद कम है, जिसे बढ़ाना अब अनिवार्य हो गया है। डॉक्टरों ने बताया कि उन्होंने कई बार राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष अपनी मांगें रखीं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ ठोस कार्रवाई का ‘आश्वासन’ ही मिला है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का मिला साथ, रिम्स को छोड़कर हर जगह विरोध

इस आंदोलन को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का भी पूर्ण समर्थन प्राप्त हो गया है, जिससे डॉक्टरों की ताकत और बढ़ गई है। वर्तमान में राजधानी रांची के रिम्स को छोड़कर राज्य के लगभग सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में यह विरोध प्रदर्शन जारी है।

“हम सेवा देना चाहते हैं, लेकिन हमारे हक की अनदेखी की जा रही है। अगर 6 अप्रैल तक सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी सरकार की होगी।” — प्रतिनिधि, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन

मरीजों पर पड़ेगा सीधा असर

यदि 6 अप्रैल से हड़ताल शुरू होती है, तो एमजीएम (जमशेदपुर), पीएमसीएच (धनबाद) और मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों में इलाज के लिए आने वाले हजारों मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ सकता है। ऑपरेशन और गंभीर बीमारियों के उपचार पर इसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।

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