बहरागोड़ा: पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड अंतर्गत पानीपाड़ा नागुडसाई में स्वर्णरेखा नदी के किनारे मिले द्वितीय विश्व युद्ध के समय के दो अति-शक्तिशाली बमों को नष्ट करने का ‘काउंडाउन’ शुरू हो गया है। लगभग 227 किलोग्राम (प्रत्येक) वजन के इन बमों को सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज करने के लिए भारतीय सेना और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त मोर्चा संभाल लिया है।
नदी के भीतर गाड़े गए बम, ‘बंकर तकनीक’ का इस्तेमाल
सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए सेना के विशेषज्ञों ने दोनों बमों को वर्तमान में नदी के भीतर सुरक्षित गहराई में गाड़ दिया है।बमों को निष्क्रिय करने के लिए नियंत्रित विस्फोट तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। विस्फोट के प्रभाव को कम करने के लिए चारों ओर बालू की बोरियों और मिट्टी का सुरक्षा घेरा बनाया गया है, ताकि कंपन का असर आसपास की बस्तियों पर न पड़े।
हाई अलर्ट पर प्रशासन: 1 किमी का इलाका ‘नो-गो ज़ोन’
ऑपरेशन की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने कड़े सुरक्षा घेरे लागू किए हैं ।घटनास्थल से 1 किमी के दायरे में किसी भी नागरिक, पशु या वाहन के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। चूंकि यह क्षेत्र झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित है, इसलिए दोनों राज्यों की सीमा से सटे गांवों में पुलिस की गश्त और चौकसी बढ़ा दी गई है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए (नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स) और अग्निशमन विभाग की टीमों को मौके पर ‘स्टैंडबाय’ मोड पर रखा गया है।
किसी भी वक्त हो सकता है धमाका
सेना के अधिकारियों के अनुसार, सभी तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और अनुकूल मौसम व सुरक्षा क्लीयरेंस मिलते ही किसी भी वक्त इन बमों को डिफ्यूज किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये बम द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस्तेमाल किए गए थे, जो दशकों बाद स्वर्णरेखा नदी के बहाव या कटाव के कारण सतह पर आए हैं।
