चाकुलिया : चाकुलिया प्रखंड के कालियाम पंचायत अंतर्गत जामबनी गांव में जंगली हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले कई दिनों से हाथियों का दल गरमा धान की खेती करने वाले किसानों के लिए काल बन गया है। बुधवार की रात मूसलाधार बारिश का फायदा उठाकर हाथियों ने खेतों में जमकर तबाही मचाई और खड़ी फसल को पूरी तरह रौंद दिया।
बारिश की आड़ में हाथियों का धावा
विगत रात्रि क्षेत्र में हो रही बारिश के कारण ग्रामीण अपने घरों में दुबके हुए थे। इसी का लाभ उठाकर पास के जंगल से हाथियों का एक दल खेतों में घुस आया। हाथियों ने मुखिया दासो हेंब्रम, कुंवर हांसदा, नेपाल हेंब्रम, सावना हेंब्रम, करिया हांसदा, किशुन हांसदा, सिदाम हेंब्रम, दुर्गा हेंब्रम और जगन्नाथ हेंब्रम के खेतों में लगी गरमा धान की फसल को पैरों तले कुचलकर नष्ट कर दिया।रात भर उत्पात मचाने के बाद सूरज ढलते ही हाथियों का दल वापस जंगल की ओर लौट गया।
कर्ज और मेहनत पर फिरा पानी
मुखिया दासो हेंब्रम ने किसानों का पक्ष रखते हुए कहा कि गरमा धान की खेती के लिए किसानों ने खाद, बीज और सिंचाई की व्यवस्था करने में भारी पूंजी निवेश की है।
“गरीब किसानों ने कड़ी मेहनत और कर्ज लेकर फसल तैयार की थी, जिसे हाथियों ने पल भर में बर्बाद कर दिया। अब किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।” — दासो हेंब्रम, मुखिया
वन विभाग के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से जंगली हाथी इसी तरह नुकसान पहुंचा रहे हैं, लेकिन वन विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। किसानों ने मांग की है कि हाथियों को आबादी वाले क्षेत्र से खदेड़कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए।प्रभावित किसानों को फसल के नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।ग्रामीणों ने दोटूक कहा है कि यदि वन विभाग ने जल्द ही कोई प्रभावी पहल नहीं की, तो क्षेत्र के किसान विभाग के खिलाफ उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
