जमशेदपुर : लौहनगरी में आधुनिक जीवनशैली से उपजने वाली बीमारियों के बीच पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति को पुनर्जीवित करने की एक बड़ी पहल शुरू हुई है। रविवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने पंचगव्य चिकित्सा और सुरक्षित खाद्य के वैज्ञानिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस दौरान घोषणा की गई कि 6 अप्रैल को शहर के प्रबुद्ध नागरिकों के लिए एक विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया जाएगा।
पंच महाभूतों का संतुलन और गौ-आधारित उपचार
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पंचगव्य आयुर्विज्ञान संस्थान (डोबो) के डायरेक्टर डॉ. मदन सिंह कुशवाहा ने कहा मानव शरीर पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश (पंच महाभूत) से बना है। इन तत्वों में असंतुलन ही बीमारियों की जड़ है।डॉ. कुशवाहा ने दावा किया कि पंचगव्य चिकित्सा न केवल सामान्य विकारों बल्कि कई जटिल और असाध्य रोगों के उपचार में भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। उन्होंने प्राकृतिक जीवनशैली, गौ-आधारित उत्पादों के उपयोग और ‘सेफ फूड’ के सेवन को आज की अनिवार्य आवश्यकता बताया।
6 अप्रैल: बेल्डीह क्लब में विशेष कार्यक्रम
आयोजकों ने जानकारी दी कि 6 अप्रैल को शाम 7 बजे बिष्टुपुर स्थित बेल्डीह क्लब में एक महत्वपूर्ण सत्र होगा। “Lifestyle Rejuvenate Through Panchagavya Therapy and Safe Food”। लोगों को यह समझाना कि कैसे पारंपरिक पद्धतियों को अपनाकर एक रोगमुक्त जीवन जिया जा सकता है।कार्यक्रम में डॉ. मदन सिंह कुशवाहा के साथ समाजसेवी राजन कमानी और माटी थेराप्यूटिक फाउंडेशन के फाउंडर आर्किटेक्ट डॉ. आकाश सिन्हा भी मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहेंगे।
आधुनिक युग में प्राचीन विज्ञान का संदेश
माटी थेराप्यूटिक फाउंडेशन की इस पहल का मुख्य उद्देश्य शहरवासियों को रसायनों से मुक्त भोजन और प्राकृतिक उपचार की ओर मोड़ना है। डॉ. आकाश सिन्हा ने बताया कि उनकी संस्था सुरक्षित खाद्य और वास्तु-आधारित स्वस्थ परिवेश के निर्माण पर कार्य कर रही है।अंत में आयोजकों ने मीडिया के माध्यम से जमशेदपुर के नागरिकों से अपील की कि वे इस कार्यक्रम में शामिल होकर अपनी जीवनशैली को बेहतर बनाने के गुर सीखें। यह पहल केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ भारत के निर्माण की दिशा में एक सशक्त कदम है।
