एनआईटी जमशेदपुर में प्राचीन भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल समापन

जमशेदपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर के भारतीय ज्ञान केंद्र और भारतीय पारंपरिक ज्ञान विज्ञान समाज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्राचीन भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर 15वीं दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन सत्र 31 मार्च 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस संगोष्ठी में देशभर से आए विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. राम विनय शर्मा, अध्यक्ष, भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र एवं उप-निदेशक, एनआईटी जमशेदपुर के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत और आधुनिक समय में उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

भारतीय ज्ञान प्रणाली की आधुनिक संदर्भ में उपयोगिता पर चर्चा

संगोष्ठी के दौरान आयोजित विभिन्न व्याख्यानों में विशेषज्ञों ने भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणाली की वैज्ञानिकता और आधुनिक संदर्भ में उसकी उपयोगिता पर अपने विचार साझा किए।श्री के. ई. एन. राघवन ने अपने व्याख्यान में गो-आधारित परंपराओं की वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय परंपराओं में प्रकृति और जीव-जंतुओं के संरक्षण की गहरी समझ निहित है।वहीं डॉ. सोहनी बनर्जी ने भारतीय ज्ञान प्रणाली को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीकों के साथ जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि यदि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ समन्वित किया जाए तो यह भविष्य के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है।

प्राचीन भारतीय विज्ञान की वैज्ञानिकता पर दिया गया जोर

डॉ. प्रेमलता देवी ने अपने व्याख्यान में प्राचीन भारतीय विज्ञान की वैज्ञानिकता और समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की प्राचीन परंपराओं में विज्ञान और तर्क का मजबूत आधार मौजूद है।समापन सत्र में डॉ. ओम प्रकाश पांडेय ने ज्ञान, विज्ञान और प्रज्ञान की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि इन तीनों के समन्वय से ही समाज का समग्र विकास संभव है।

शिक्षा और ज्ञान-विज्ञान के समन्वय पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

समापन समारोह में प्रो. देवी प्रसाद मिश्रा, संस्थापक अध्यक्ष, भारतीय पारंपरिक ज्ञान विज्ञान समाज एवं पूर्व निदेशक, एनआईटीटीटीआर कोलकाता ने “शिक्षक बनो अभियान” के साथ ज्ञान, विज्ञान और प्रज्ञान की महत्ता पर अपने विचार व्यक्त किए।मुख्य अतिथि डॉ. नरेंद्र कुमार ने ज्योतिष के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा की उपयोगिता पर अपने विचार साझा किए।इस अवसर पर प्रो. राकेश सहगल ने शिक्षा व्यवस्था में संस्कृत भाषा के समावेशन की आवश्यकता पर बल दिया।

संगोष्ठी में बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी और शोधार्थी हुए शामिल

कार्यक्रम के अंत में एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने सभी प्रतिभागियों, वक्ताओं और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। समापन समारोह में संस्थान की प्रथम महिला श्रीमती इंद्राणी सूत्रधार सहित प्रो. प्रभा चंद, प्रो. ए. के. एल. श्रीवास्तव, प्रो. एच. एल. यादव, प्रो. एस. बी. प्रसाद, डॉ. राज नंदकेोल्यार, डॉ. दीपक कुमार समेत कई संकाय एवं गैर-संकाय सदस्य तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।अंत में डॉ. जितेंद्र कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए प्रो. शैलेन्द्र कुमार, डॉ. रत्नेश मिश्रा, डॉ. कौशलेंद्र और डॉ. अशोक मंडल सहित सभी संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के योगदान की सराहना की। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. मनीष कुमार झा द्वारा किया गया।यह संगोष्ठी भारतीय पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।

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