विश्व पर्यावरण दिवस: मानगो के ‘ट्री मैन’ जावेद अख्तर बना रहे हरियाली की नई मिसाल

जमशेदपुर: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जहां पूरे देश में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं जमशेदपुर के मानगो क्षेत्र से प्रकृति प्रेम और हरियाली की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। मानगो के अलबेला गार्डन निवासी जावेद अख्तर, जिन्हें स्थानीय लोग प्यार से ‘ट्री मैन’ के नाम से जानते हैं, वर्षों से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अनूठा योगदान दे रहे हैं।

हजारों दुर्लभ पौधों से सजा है ‘राबिया फार्म हाउस’

स्कूल के दिनों से ही पेड़-पौधों के प्रति विशेष लगाव रखने वाले जावेद अख्तर ने अपने आवास परिसर को ‘राबिया फार्म हाउस’ के रूप में विकसित किया है। यहां देश और विदेश की दुर्लभ प्रजातियों के हजारों फलदार, फूलदार और औषधीय पौधे मौजूद हैं।उनके फार्म हाउस में आम, लीची, अमरूद, चीकू, ड्रैगन फ्रूट जैसे फलदार पौधों के साथ-साथ मियाजाकी आम, रम्बूटान और एवोकाडो जैसी विदेशी प्रजातियां भी आकर्षण का केंद्र हैं। वहीं ऑर्किड, अंथुरियम, जरबेरा और दुर्लभ कैक्टस की कई किस्में इस गार्डन की खूबसूरती को और बढ़ाती हैं।

खुद करते हैं पौधों की देखभाल

जावेद अख्तर प्रतिदिन सुबह और शाम अपने गार्डन की देखरेख करते हैं। पौधों को खाद-पानी देने से लेकर उनकी कटिंग और संरक्षण तक का काम वे स्वयं करते हैं।जावेद बताते हैं कि पेड़ लगाना उनके लिए केवल शौक नहीं बल्कि जुनून है। इस अभियान में उनके परिवार का भी पूरा सहयोग मिलता है। उनकी पत्नी और बच्चे भी पौधों की देखभाल और जैविक खेती से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

लोगों को मुफ्त में सिखाते हैं पौधों की तकनीक

जावेद अख्तर का राबिया फार्म हाउस अब पर्यावरण प्रेमियों, विद्यार्थियों और कृषि में रुचि रखने वाले लोगों के लिए सीखने का केंद्र बन गया है। यहां आने वाले लोगों को वे बिना किसी शुल्क के ग्राफ्टिंग, कटिंग और जैविक खाद बनाने की तकनीक सिखाते हैं।उनकी प्रेरणा से आसपास के कई लोगों ने भी अपने घरों में पौधे लगाने और हरियाली बढ़ाने की पहल शुरू की है।

आने वाली पीढ़ी के लिए हरियाली छोड़ने का सपना

जावेद अख्तर का सपना है कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए हजारों फलदार और औषधीय पौधे तैयार कर जाएं। उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।उन्होंने कहा, “एक पेड़ लगाना सौ पुण्य के बराबर है। यदि हर व्यक्ति एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे, तो धरती फिर से हरी-भरी और प्रदूषण मुक्त बन सकती है।”

पर्यावरण संरक्षण का जीवंत उदाहरण

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जावेद अख्तर की यह पहल समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका प्रयास यह संदेश देता है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो एक व्यक्ति भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है।

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