लोहरदगा : लोहरदगा सदर अस्पताल में इन दिनों “बिल्ली को दूध की रखवाली” वाली कहावत पूरी तरह चरितार्थ हो रही है। ग्रामीण इलाकों से गरीब मरीजों को बेहतर इलाज के लिए सरकारी अस्पताल लाने की जिम्मेदारी जिस सहिया पर है, वही अब चंद रुपयों के कमीशन के चक्कर में मरीजों की जान जोखिम में डालकर उन्हें निजी अस्पतालों में ‘सप्लाई’ कर रही हैं।हाल ही में सदर अस्पताल से एक प्रसूता (गर्भवती महिला) को स्कूटी पर लादकर निजी अस्पताल ले जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है।
हाथ में सलाइन की बोतल, स्कूटी पर सिजेरियन मरीज; रोंगटे खड़े करने वाला वीडियो
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि लोहरदगा सदर अस्पताल में सिजेरियन (ऑपरेशन) के लिए एक प्रसूता भर्ती हुई थी। अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा इलाज शुरू किए जाने के बीच ही एक स्थानीय सहिया ने मरीज के परिजनों का ‘ब्रेनवॉश’ (गुमराह) किया।इसके बाद वह सहिया अपने पति के सहयोग से उस गंभीर प्रसूता महिला को स्कूटी पर बीच में बैठाकर अस्पताल से निकाल ले गई। हद तो तब हो गई जब सिजेरियन मरीज के हाथ में चढ़ रहे सलाइन को सहिया खुद अपने हाथों में पकड़े हुए स्कूटी पर पीछे बैठी रही और शहरी क्षेत्र के एक नामचीन निजी अस्पताल तक पहुंचाया। मरीज की जान के साथ खिलवाड़ की यह लाइव तस्वीरें कैमरे में कैद हो गई हैं।
शाम होते ही सक्रिय हो जाता है दलालों का सिंडिकेट
सदर अस्पताल के अंदरूनी सूत्रों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह कोई पहली घटना नहीं है। अस्पताल परिसर अब पूरी तरह से बिचौलियों और दलालों का अड्डा बन चुका है।सदर अस्पताल के वार्ड से लेकर ओपीडी और इमरजेंसी विंग तक में कई सहिया और बाहरी दलाल सक्रिय रूप से घूमते रहते हैं। ये लोग अस्पताल में आने वाले गरीब और सीधे-साधे ग्रामीणों की लाचारी व भीड़ का फायदा उठाते हैं। शाम ढलते ही निजी अस्पतालों के एजेंट सदर अस्पताल के वार्डों में घुस जाते हैं। सरकारी डॉक्टरों के प्रति अविश्वास पैदा कर और डरा-धमका कर, मरीजों को बाइक, स्कूटी और निजी वाहनों के जरिए निजी क्लीनिकों में शिफ्ट कर दिया जाता है। इसके बदले इन सहिया और दलालों को निजी अस्पतालों से मोटी रकम (कमीशन) मिलती है। चर्चा तो यह भी है कि कुछ रसूखदार सहियाओं ने मरीजों की दलाली कर-करके शहर में अपना खुद का प्राइवेट अस्पताल तक खोल लिया है।
“रेफरल अस्पताल” बनकर रह गया है लोहरदगा सदर अस्पताल
इस पूरी लचर व्यवस्था से जिले के आम नागरिकों में भारी आक्रोश है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत और आधुनिक सुविधाओं के दावों के बावजूद लोहरदगा सदर अस्पताल महज एक ‘रेफरल अस्पताल’ बनकर रह गया है। छोटी सी बीमारी या प्रसव के मामलों में भी मरीजों को या तो रिम्स (रांची) रेफर कर दिया जाता है, या फिर अस्पताल परिसर में घूम रहे दलाल उन्हें चंगुल में फंसाकर निजी नर्सिंग होम ले जाते हैं, जहां गरीबों की गाढ़ी कमाई लूट ली जाती है। इस पूरे खेल को रोकने वाला शायद कोई सिस्टम या सुरक्षा गार्ड यहां मौजूद नहीं है।
सिविल सर्जन बोले— “मामला गंभीर है, होगी सख्त कार्रवाई”
मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने और मीडिया कर्मियों द्वारा सवाल पूछे जाने के बाद लोहरदगा के सिविल सर्जन ने इस पर संज्ञान लिया है। सिविल सर्जन ने कैमरे पर कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और सीधे तौर पर मरीज की जान से खिलवाड़ और सरकारी सेवा शर्तों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा “वायरल वीडियो के आधार पर संबंधित सहिया और उसके मददगारों को चिन्हित किया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन इस मामले की आंतरिक जांच करा रहा है। दोषी पाई जाने वाली सहिया को सेवामुक्त करने के साथ-साथ निजी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को पत्र लिखा जाएगा।”अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग का यह आश्वासन केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहता है या फिर सदर अस्पताल को इन दलालों के चंगुल से हमेशा के लिए मुक्ति मिल पाती है।
