जमशेदपुर में भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम), पूर्वी सिंहभूम की ओर से बुधवार को उपायुक्त के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। संगठन ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित व्यापार समझौता किसानों, मजदूरों और आम जनता के हितों के खिलाफ है तथा इसके लागू होने से देश की कृषि व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।
आयात शुल्क में कटौती से भारतीय किसानों को होगा नुकसान: एसकेएम
ज्ञापन में संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका से आने वाले औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क में भारी कटौती या उसे समाप्त करने की तैयारी की जा रही है। इससे अमेरिकी गेहूं, चावल, मक्का, दालें, सोयाबीन, डेयरी उत्पाद, फल, सूखे मेवे, कपास और पोल्ट्री उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर उपलब्ध होंगे। संगठन का दावा है कि इससे भारतीय किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा।
भारत और अमेरिका की कृषि व्यवस्था की तुलना संभव नहीं
मोर्चा ने कहा कि अमेरिका और भारत की कृषि व्यवस्था पूरी तरह अलग है। अमेरिका में केवल दो प्रतिशत आबादी कृषि से जुड़ी है और वहां किसानों को सरकार की ओर से भारी सब्सिडी मिलती है। वहीं भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत हैं, जो पहले से ही बढ़ती लागत, कर्ज और फसलों के कम दाम जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
खेती की बढ़ती लागत को लेकर भी जताई चिंता
संयुक्त किसान मोर्चा ने आरोप लगाया कि खाद, बीज, डीजल और कीटनाशकों की कीमतों में लगातार वृद्धि के कारण खेती की लागत बढ़ गई है। ऐसे में यदि विदेशी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोल दिया जाता है तो देश के किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो जाएगी।
समझौते पर पुनर्विचार नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
संगठन ने राष्ट्रपति से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर पुनर्विचार करने और किसानों व मजदूरों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों की अनदेखी की तो देशभर में व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा।
