जमशेदपुर: कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महात्मा गांधी मेमोरियल अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी एक बार फिर बढ़ गई। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए जा रहे सरकारी दावों के बीच शनिवार को अस्पताल की व्यवस्थागत खामी सामने आई, जब एक लिफ्ट अचानक बीच रास्ते में बंद हो गई।
लिफ्ट में करीब 20 से 25 लोग सवार थे। अचानक लिफ्ट रुकने के बाद अंदर मौजूद मरीजों और परिजनों में अफरा-तफरी मच गई।
बीच रास्ते में बंद हुई लिफ्ट, मरीजों में मचा हड़कंप
जानकारी के अनुसार, एमजीएम अस्पताल की लिफ्ट में मरीजों, बुजुर्गों और उनके परिजनों समेत करीब 20 से 25 लोग सवार थे। इसी दौरान लिफ्ट अचानक बीच रास्ते में रुक गई।लिफ्ट बंद होने के बाद अंदर मौजूद लोगों ने मदद के लिए आवाज लगाई। कुछ समय तक लोग लिफ्ट में फंसे रहे, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
घुटन और डर से कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लिफ्ट में फंसे लोगों में कई मरीज और बुजुर्ग भी शामिल थे। बंद लिफ्ट के अंदर घुटन और डर के कारण कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी।हालांकि, समय रहते अस्पताल कर्मियों और तकनीकी कर्मचारियों ने राहत कार्य शुरू किया और सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना में किसी बड़े हादसे की सूचना नहीं है।
अस्पताल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद सभी को निकाला
लिफ्ट बंद होने की सूचना मिलते ही अस्पताल के कर्मचारी और तकनीकी टीम मौके पर पहुंची। कर्मचारियों ने लिफ्ट को खोलने का प्रयास शुरू किया।काफी मशक्कत के बाद लिफ्ट में फंसे सभी मरीजों और परिजनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
पहले भी सामने आ चुकी हैं लिफ्ट खराब होने की घटनाएं
एमजीएम अस्पताल में लिफ्ट खराब होने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी अस्पताल की लिफ्टों में तकनीकी खराबी की शिकायतें सामने आती रही हैं।बार-बार लिफ्ट खराब होने की घटनाओं ने अस्पताल की रखरखाव व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मरीजों ने नियमित जांच और मरम्मत की मांग की
घटना के बाद मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से लिफ्टों की नियमित जांच कराने और समय पर मरम्मत सुनिश्चित करने की मांग की है।लोगों का कहना है कि अस्पताल में मरीजों और बुजुर्गों की आवाजाही के लिए लिफ्ट बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में लिफ्ट की तकनीकी खराबी को गंभीरता से लेते हुए नियमित मेंटेनेंस जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके।
