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गम्हरिया । सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया थाना परिसर में महिला के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले में गम्हरिया थाने में पदस्थापित वायरलेस ऑपरेटर नीरज लकड़ा को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं, जांच प्रतिवेदन के आधार पर थाना प्रभारी समेत छह पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों को निलंबित किया गया है। घटना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
सुरक्षा की गुहार लेकर थाने पहुंची थी महिला
पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, घटना 29 अक्टूबर की रात की है। पीड़िता ने 30 अक्टूबर को लिखित आवेदन देकर बताया कि 29 अक्टूबर की शाम करीब छह बजे पति के साथ कहासुनी हुई थी। उसे आशंका थी कि रात में पति उसके साथ मारपीट कर सकते हैं। इसी डर से वह घर से निकलकर पड़ोस में रहने वाली एक महिला के घर पहुंची और पुलिस को सूचना देने का आग्रह किया।इसके बाद गम्हरिया पुलिस की पीसीआर वैन मौके पर पहुंची और महिला को रात करीब 12 बजे थाने लेकर आई। आरोप है कि थाने में ड्यूटी पर तैनात पुलिस पदाधिकारी ने उसे बगल के कमरे में आराम करने को कहा। इसी दौरान थाने में वायरलेस ऑपरेटर के पद पर तैनात नीरज लकड़ा ने उसके साथ दुष्कर्म किया।
आरोपी गिरफ्तार, छह पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने कार्रवाई करते हुए आरोपी सहायक अवर निरीक्षक नीरज लकड़ा को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस ने उसके कमरे से घटना के समय पहने गए कपड़े भी जब्त किए हैं। निलंबित किए गए पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों में थाना प्रभारी संजय प्रसाद, पुलिस अवर निरीक्षक अनिरुद्ध सिंह, मनोज साहू, आरक्षी संतोष राय, हवलदार मुनेश्वर कुमार और आरोपी वायरलेस ऑपरेटर नीरज लकड़ा शामिल हैं। घटना के बाद थाने में महिलाओं की सुरक्षा, पुलिसकर्मियों की जवाबदेही और शिकायत लेकर आने वाले लोगों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
विद्युत वरण महतो बोले- केवल निलंबन पर्याप्त नहीं

जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो ने घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, “झारखंड के गम्हरिया थाने में रक्षक ही जब हैवान बन जाएं और थाने की दीवारों के भीतर महिला की चीखें घोंट दी जाएं, तो यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि राज्य के अराजक शासन और मानवीय संवेदनाओं की चीरहरण का जीवंत प्रमाण है। केवल निलंबन की खानापूर्ति नहीं, बल्कि दोषियों को तत्काल बर्खास्त कर सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए।”
पूर्व सांसद सुमन महतो ने जताई नाराजगी

पूर्व सांसद सुमन महतो ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि यह बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण मामला है। उन्होंने कहा,“इस घटना की जितनी भी निंदा की जाए, वह कम है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो आम लोग न्याय और सुरक्षा की उम्मीद किससे करेंगे? यह बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण मामला है।”उन्होंने मामले में न्याय सुनिश्चित करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
शिव शंकर सिंह बोले- निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई जरूरी

समाजसेवी शिव शंकर सिंह ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा आज भी एक बड़ा सवाल बनी हुई है। उन्होंने कहा, “आजादी के इतने वर्षों बाद भी महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ा सवाल बनी हुई है। जिस थाने में एक महिला न्याय और मदद की गुहार लगाने पहुंची, वहीं उसके साथ इस तरह की घटना का आरोप बेहद चिंताजनक है। इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।”उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में जांच पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और लोगों का कानून-व्यवस्था पर भरोसा बना रहे।
देविका सिंह ने उठाया महिला सुरक्षा का मुद्दा

ऑल इंडिया इंटक महिला विंग की चेयरपर्सन देविका सिंह ने घटना को महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया। उन्होंने कहा,“हम एक ओर महिला सशक्तीकरण की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर थाने जैसी सुरक्षा देने वाली जगह पर महिला के साथ इस तरह की घटना का आरोप बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। महिलाओं को हर परिस्थिति में सुरक्षित महसूस करने का अधिकार है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई बेहद जरूरी है।”उन्होंने कहा कि महिलाओं को सहायता और सुरक्षा देने वाली संस्थाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।
राकेश्वर पांडेय ने कहा- पुलिस पर भरोसा कायम रखना जरूरी

इंटक अध्यक्ष राकेश्वर पांडेय ने कहा कि मदद की उम्मीद लेकर थाने पहुंची महिला के साथ ऐसी घटना का आरोप बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा,“जब कोई महिला मदद और न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंचती है, तो उसके साथ इस तरह की घटना का आरोप बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह चिंता केवल गम्हरिया थाने तक सीमित नहीं है। ऐसी घटनाओं से महिलाओं के मन में पुलिस थानों में अपनी सुरक्षा को लेकर आशंका पैदा हो सकती है। पुलिस प्रशासन को मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि समाज में सुरक्षा और न्याय का सकारात्मक संदेश जाए।”
जांच और जवाबदेही पर टिकी निगाहें
गम्हरिया थाना परिसर में सामने आए इस मामले ने पुलिस व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है। आरोपी की गिरफ्तारी और छह पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद अब जांच के निष्कर्षों तथा आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि केवल विभागीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी,बल्कि निष्पक्ष जांच के आधार पर दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
