अग्नि सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, नागरिक भी निभाएं अपना दायित्व: न्यायमूर्ति दीपक रोशन

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जमशेदपुर: आग से सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को भी इसके प्रति जागरूक होकर अपनी भूमिका निभानी होगी। भवनों में अग्नि सुरक्षा के नियमों का पालन, उपकरणों का नियमित रखरखाव और आपात स्थिति में दमकल वाहनों के पहुंचने के लिए पर्याप्त रास्ते सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। यह बात झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन ने रविवार को बिष्टुपुर स्थित चैंबर भवन में आयोजित अग्नि सुरक्षा जागरूकता एवं बचाव संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही।कार्यक्रम का आयोजन सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैटेरियल्स मैनेजमेंट (आईआईएमएम) ने संयुक्त रूप से किया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने अग्नि सुरक्षा के नियमों के पालन, भवनों के नियमित निरीक्षण और आग की घटनाओं को रोकने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया।

अपनी गलतियों और लापरवाही को भी पहचानें: न्यायमूर्ति रोशन

न्यायमूर्ति दीपक रोशन ने कहा कि आग लगने की घटनाओं के बाद अक्सर लोग सरकार और संबंधित विभागों को जिम्मेदार ठहराते हैं, लेकिन अपनी गलतियों और लापरवाही पर ध्यान नहीं देते। भवन मालिकों और वहां रहने वाले लोगों को अग्नि सुरक्षा के इंतजामों की नियमित जांच करनी चाहिए। केवल नियम और कानून बना देने से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि उनका पालन करना भी आवश्यक है।अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि पहले नैतिक शिक्षा की किताबों में आग और पानी जैसी आपात स्थितियों से निपटने के सामान्य उपाय भी सिखाए जाते थे। बच्चों को बचपन से ही आग लगने पर रेत के इस्तेमाल जैसे बुनियादी उपायों की जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि सुरक्षा के प्रति जागरूकता उनके व्यवहार का हिस्सा बन सके।उन्होंने कहा कि कई बहुमंजिली इमारतों में नियमित रखरखाव नहीं होता और लोग रखरखाव शुल्क तक जमा नहीं करते। इसका असर भवनों की सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ता है। वहीं, संकरी सड़कों और पर्याप्त जगह की कमी के कारण कई स्थानों पर दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में परेशानी होती है। इससे शुरुआती मिनटों में राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो सकता है।न्यायमूर्ति रोशन ने लोगों से रोजाना दो से तीन मिनट आत्ममंथन करने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार और अधिकारियों की आलोचना करने से पहले हर व्यक्ति को यह देखना चाहिए कि वह स्वयं क्या सुधार कर सकता है।

आग लगने के बाद नहीं, पहले से हो बचाव की तैयारी: अतुल भटनागर

टाटा स्टील यूआईएसएल के प्रबंध निदेशक अतुल भटनागर ने कहा कि अग्नि सुरक्षा के मामले में घटना होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय रोकथाम और बचाव पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।उन्होंने शहर की एक इमारत में हाल में लगी आग का उल्लेख करते हुए बताया कि घटना में कई कंप्यूटर और महत्वपूर्ण दस्तावेज जलकर नष्ट हो गए थे। हालांकि, वहां मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और दमकल वाहन भी मौके पर पहुंचा। उन्होंने कहा कि आग बुझने और लोगों के सुरक्षित निकल जाने के बाद अक्सर घटना पर चर्चा बंद हो जाती है, जबकि यह पता लगाना जरूरी है कि आग कैसे लगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।भटनागर ने भवन मालिकों, प्रबंधन समितियों, आवासीय सोसायटियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से नियमित सुरक्षा जांच कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि उपलब्ध तकनीक और विशेषज्ञ एजेंसियों की मदद से आग के संभावित खतरों का आकलन कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास और शहरीकरण के क्षेत्र में जमशेदपुर ने देश के सामने एक उदाहरण पेश किया है। अब शहर को अग्नि सुरक्षा के क्षेत्र में भी नए मानक स्थापित करने और इसे अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।

राष्ट्रीय भवन संहिता और अग्निशमन कानून के पालन पर जोर

पूर्व डीआईजी (होमगार्ड एवं अग्निशमन सेवा) दीपक सिन्हा (आईपीएस) ने राष्ट्रीय भवन संहिता (एनबीसी) और झारखंड अग्निशमन सुरक्षा अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के बीच सार्वजनिक सुरक्षा का महत्व और बढ़ गया है। बहुमंजिली इमारतों, सिनेमा हॉल, मॉल, अस्पतालों और अन्य बड़े प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन जरूरी है।सिन्हा ने भवनों में आग से जुड़े जोखिमों का आकलन करने, प्रभावी फायर अलार्म सिस्टम लगाने और नियमित निरीक्षण कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिन प्रतिष्ठानों में सैकड़ों या हजारों लोग काम करते हैं अथवा आते-जाते हैं, वहां आपात स्थिति में समय रहते सूचना देने और लोगों की सुरक्षित निकासी के लिए प्रभावी अलार्म व्यवस्था होनी चाहिए।उन्होंने झारखंड अग्निशमन सुरक्षा अधिनियम, 2014 का उल्लेख करते हुए बताया कि निर्धारित क्षमता और क्षेत्रफल वाले सिनेमा हॉल, व्यावसायिक परिसरों, होटलों तथा अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा के प्रावधानों का पालन आवश्यक है।सिन्हा ने कहा कि अग्नि सुरक्षा को महज औपचारिकता नहीं समझना चाहिए। भवनों में जोखिम का आकलन, फायर अलार्म की व्यवस्था और नियमित निरीक्षण के जरिए आग की घटनाओं की आशंका कम की जा सकती है तथा जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

सामूहिक भागीदारी से ही सुरक्षित बनेंगे भवन

संगोष्ठी में वक्ताओं ने एकमत होकर कहा कि अग्नि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था के साथ भवन मालिकों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, आवासीय सोसायटियों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। नियमित रखरखाव, सुरक्षा नियमों का पालन और आपात स्थिति के लिए पहले से तैयारी करके आग से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

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