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जमशेदपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में जमशेदपुर महानगर का शाखा संगम आयोजित किया गया। इसमें महानगर की 213 शाखाओं के स्वयंसेवक एकत्रित हुए। कार्यक्रम में अनुशासन, सामूहिक सहभागिता और संगठनात्मक एकात्मता पर जोर दिया गया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक डॉ. गौतम सूत्रधर उपस्थित रहे। वहीं, मुख्य वक्ता के रूप में आरएसएस के उत्तर-पूर्व क्षेत्र (बिहार-झारखंड) के बौद्धिक प्रमुख राणा प्रताप ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया।
शाखा व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला : डॉ. गौतम सूत्रधर
मुख्य अतिथि डॉ. गौतम सूत्रधर ने अपने संबोधन में राष्ट्र निर्माण और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में आरएसएस के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने संघ के सामाजिक कार्यों, सेवा गतिविधियों, संगठन और सामाजिक जागरूकता के प्रसार में स्वयंसेवकों की भूमिका पर प्रकाश डाला।उन्होंने कहा, “शाखा संघ का प्राण है।” उनके अनुसार, शाखा व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला है, जहां नियमित सहभागिता से अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, सकारात्मक सोच और सामाजिक दायित्वबोध जैसे गुण विकसित होते हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलाव आगे चलकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संगठित और अनुशासित समाज के निर्माण पर जोर
मुख्य वक्ता राणा प्रताप ने अपने बौद्धिक उद्बोधन में आरएसएस की स्थापना की पृष्ठभूमि और उस समय देश तथा समाज के सामने मौजूद चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि संगठित, अनुशासित और राष्ट्रभाव से युक्त समाज के निर्माण की आवश्यकता को ध्यान में रखकर संघ की स्थापना हुई थी।उन्होंने शाखा की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल शारीरिक गतिविधियों या नियमित मिलन का केंद्र नहीं, बल्कि व्यक्ति निर्माण की प्रयोगशाला है। शाखा के माध्यम से स्वयंसेवकों में समयबद्धता, नेतृत्व क्षमता, सामूहिकता, आत्मविश्वास, सामाजिक समरसता और राष्ट्र के प्रति समर्पण जैसे गुणों का विकास होता है।उन्होंने कहा कि संघ का कार्य केवल संगठन का विस्तार करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना और लोगों को राष्ट्र तथा समाज के प्रति अपने दायित्वों के प्रति जागरूक करना भी है।
पंच परिवर्तन की अवधारणा पर विशेष जोर
अपने संबोधन में राणा प्रताप ने संघ की ओर से प्रस्तावित पंच परिवर्तन की अवधारणा का भी उल्लेख किया। इसके तहत सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी का आचरण और नागरिक कर्तव्य जैसे पांच विषयों को समाज परिवर्तन का आधार बताया गया।उन्होंने इन विषयों को केवल विचारों तक सीमित रखने के बजाय दैनिक जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, इन मूल्यों को व्यवहार में उतारकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं।
213 शाखाओं के स्वयंसेवकों का सामूहिक एकत्रीकरण
संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित इस शाखा संगम में जमशेदपुर महानगर की 213 शाखाओं के स्वयंसेवकों ने भाग लिया। आयोजन के माध्यम से शाखा गतिविधियों, संगठनात्मक एकात्मता और समाज के प्रति स्वयंसेवकों की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया गया।कार्यक्रम का समापन संघ की प्रार्थना के साथ हुआ। इस दौरान स्वयंसेवकों ने संघ के आदर्शों, राष्ट्रभाव और समाज के प्रति समर्पण के संकल्प को दोहराया।
