
जमशेदपुर: जमशेदपुर में अपनी मांगों को लेकर मुखर बस्ती बचाओ संघर्ष समिति का आंदोलन आज एक बड़ी जीत के साथ संपन्न हुआ। आंदोलन की गंभीरता और बस्तीवासियों के आक्रोश को देखते हुए जुस्को के प्रबंध निदेशक अतुल कुमार भटनागर को स्वयं आंदोलन स्थल पर उतरना पड़ा। एमडी के सीधे हस्तक्षेप और ठोस आश्वासन के बाद समिति ने फिलहाल अपना आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया है।
एमडी ने खुद किया क्षेत्र का निरीक्षण
आमतौर पर प्रबंधन के प्रतिनिधि ही आंदोलनों में वार्ता के लिए जाते हैं, लेकिन इस बार मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एमडी अतुल कुमार भटनागर ने खुद कमान संभाली। उन्होंने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर वहां की मौजूदा स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। उनके साथ जुस्को के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, जिन्हें उन्होंने मौके पर ही समस्याओं के त्वरित आकलन और समाधान के निर्देश दिए।
रामबाबू तिवारी ने सौंपा मांगों का पुलिंदा
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष रामबाबू तिवारी ने प्रबंधन के सामने बस्तीवासियों की समस्याओं को प्रमुखता से रखा। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की घोर कमी है।बुनियादी ढांचे (सड़क, नाली), नियमित जलापूर्ति, बिजली की व्यवस्था और लंबे समय से लंबित स्थानीय विकास के कार्यों को तुरंत शुरू करने की मांग की गई है। इन सभी समस्याओं से संबंधित एक विस्तृत मांग पत्र जुस्को के एचआर एवं प्रबंधन विभाग को औपचारिक रूप से सौंप दिया गया है।
प्रबंधन का आश्वासन: “जल्द होगा समाधान”
वार्ता के दौरान जुस्को एमडी ने स्वीकार किया कि स्थानीय स्तर पर कुछ सुधारों की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया कि समिति द्वारा उठाई गई मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और एक निश्चित समय सीमा के भीतर समस्याओं का चरणबद्ध तरीके से समाधान किया जाएगा।
सफलता के बाद फिलहाल आंदोलन स्थगित
रामबाबू तिवारी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि जुस्को प्रबंधन और स्वयं एमडी द्वारा मिले सकारात्मक आश्वासन के बाद फिलहाल आंदोलन को विराम दिया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट चेतावनी भी दी अगर तय समय सीमा के भीतर हमारी समस्याओं का समाधान धरातल पर नहीं दिखा, तो समिति अगली रणनीति तय करेगी और इससे भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
बड़ी संख्या में उमड़े बस्तीवासी
पूरे आंदोलन के दौरान क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनी रही, लेकिन बस्तीवासियों की भारी भीड़ ने प्रबंधन पर दबाव बनाने में अहम भूमिका निभाई। स्थानीय लोगों ने इसे अपनी एकता की जीत बताया है।
