जमशेदपुर से ‘हड़ताल’ का शंखनाद: 12 फरवरी को देशव्यापी चक्का जाम, कर्मचारियों ने केंद्र की नीतियों को बताया ‘गुलामी का दस्तावेज’

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जमशेदपुर: केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ देश के मजदूरों, किसानों और कर्मचारियों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। 12 फरवरी 2026 को होने वाली राष्ट्रीय आम हड़ताल ऐतिहासिक होगी। यह महत्वपूर्ण घोषणा अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने जमशेदपुर के सिदगोड़ा स्थित बिरसा मुंडा टाउन हॉल में की।

अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ का 8वां राज्य सम्मेलन

अवसर था झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के दो दिवसीय आठवें प्रतिनिधि सम्मेलन का। कार्यक्रम की शुरुआत कार्यकारी राज्य अध्यक्ष नवीन कुमार द्वारा झंडोत्तोलन के साथ हुई। सीटू के राज्य महासचिव विश्वजीत देव ने प्रदेश भर से आए प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए संघर्ष को तेज करने का आह्वान किया।उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने भी सम्मेलन को संबोधित किया और कार्यक्रम के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं।

“मजदूरों की गुलामी के दस्तावेज हैं नए लेबर कोड”

अधिवेशन को संबोधित करते हुए सुभाष लांबा ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा 12 फरवरी की हड़ताल में बीएमएस को छोड़कर देश की सभी 10 बड़ी ट्रेड यूनियनें और केंद्र-राज्य सरकार के सैकड़ों फेडरेशन एक साथ शामिल होंगे।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने 44 श्रम कानूनों को खत्म कर जो 4 लेबर कोड लागू किए हैं, वे पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने और मजदूरों को गुलाम बनाने के लिए हैं।
लांबा ने कहा कि कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना की बहाली चाहते थे, लेकिन सरकार ने ‘यूपीएस’ (UPS) लागू कर उनके साथ अन्याय किया है।

डीए-डीआर और नियमितीकरण पर सरकार मौन

राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष शशिकांत राय ने प्रतिनिधि सत्र का उद्घाटन करते हुए वित्तीय मुद्दों पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा देश में रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन हो रहा है, लेकिन कर्मचारियों का 18 महीने का डीए और डीआर आज तक जारी नहीं किया गया। ठेका और संविदा कर्मियों को नियमित करने और ‘समान काम-समान वेतन’ देने की मांग पर सरकार पूरी तरह मौन है।

सोमवार को होगा नई राज्य कमेटी का चुनाव

महामंत्री रविंद्र नाथ ठाकुर के संचालन में चल रहे इस सम्मेलन में राज्य अध्यक्ष राजेश रंजन दुबे सहित कई दिग्गज नेताओं ने शिरकत की। सम्मेलन के पहले दिन वैचारिक मंथन हुआ, वहीं सोमवार को रिपोर्ट पर बहस की जाएगी और उसके उपरांत आगामी कार्यकाल के लिए नई राज्य कमेटी का चुनाव संपन्न होगा।

मुख्य मांगें जिन पर टिकी है हड़ताल

पुरानी पेंशन योजना की पूर्ण बहाली,चार नए लेबर कोड को रद्द करना,संविदा और ठेका कर्मियों का नियमितीकरण और 18 माह के बकाया डीए-डीआर का तत्काल भुगतान।

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