एनआईटी जमशेदपुर: ‘रन फॉर स्वदेशी’ में दौड़े 400 छात्र, स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती पर युवाओं ने ली आत्मनिर्भरता की शपथ

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जमशेदपुर: स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती और राष्ट्रीय युवा दिवस के गौरवशाली अवसर पर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान , जमशेदपुर द्वारा “रन फॉर स्वदेशी” मैराथन का भव्य आयोजन किया गया। बिष्टुपुर स्थित डाउनस ग्राउंड में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों ने न केवल अपनी शारीरिक क्षमता का परिचय दिया, बल्कि राष्ट्र निर्माण और आत्मनिर्भर भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।

5 किलोमीटर की दौड़: ऊर्जा और देशभक्ति का संगम

कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु 5 किलोमीटर की दौड़ रही। कड़ाके की ठंड के बावजूद छात्रों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। संस्थान के लगभग 400 विद्यार्थियों ने इस दौड़ में भाग लेकर अनुशासन और एकता का परिचय दिया। इस आयोजन का मूल उद्देश्य युवाओं के भीतर स्वामी विवेकानंद के विचारों को जागृत करना, देशभक्ति की भावना भरना और स्वदेशी उत्पादों के प्रति जागरूकता पैदा करना था।प्रतिभागी छात्रों ने ‘एकता और दृढ़ संकल्प’ के साथ दौड़ पूरी की, जो इस बात का प्रतीक बनी कि देश का युवा राष्ट्र निर्माण में अपनी सामूहिक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

संस्थान के दिग्गजों ने बढ़ाया उत्साह

दौड़ को हरी झंडी दिखाने और छात्रों का मनोबल बढ़ाने के लिए एनआईटी जमशेदपुर के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर , अध्यक्ष , एनएसएस समन्वयक और एसएएस सहायक सहित कई विभागों के प्रमुखों ने छात्रों के साथ संवाद किया।वक्ताओं ने स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध कथन “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” को याद करते हुए विद्यार्थियों को निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

फिटनेस और सर्वांगीण विकास पर जोर

एनआईटी प्रशासन ने इस आयोजन के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली का संदेश भी दिया। संस्थान का मानना है कि एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार के लिए आवश्यक है। यह आयोजन एनआईटी जमशेदपुर की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जहाँ पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों के शारीरिक और नैतिक विकास पर भी ध्यान दिया जाता है।

सफल समापन और संकल्प

कार्यक्रम का समापन अत्यंत उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। प्रतिभागियों ने स्वामी विवेकानंद के आदर्शों के अनुरूप ऊर्जा और समर्पण का परिचय दिया। इस ‘रन फॉर स्वदेशी’ ने यह स्पष्ट कर दिया कि तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ एनआईटी के छात्र राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति भी उतने ही सजग हैं।

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