
गालुडीह (घाटशिला):पूर्वी सिंहभूम जिले के गालुडीह थाना क्षेत्र में अपराध का ग्राफ एक बार फिर बढ़ गया है। सोमवार को उलदा पंचायत के पास खड़िया कॉलोनी बस स्टैंड स्थित प्रज्ञा केंद्र में घुसकर बाइक सवार अपराधियों ने संचालक सह भाजपा नेता उमाकांत महतो की गोली मारकर हत्या कर दी। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
दिनदहाड़े वारदात: प्रज्ञा केंद्र में घुसकर मारी गोली
जानकारी के अनुसार, उमाकांत महतो रोज की तरह अपने प्रज्ञा केंद्र में काम कर रहे थे। इसी दौरान एक बाइक पर सवार तीन युवक वहां पहुंचे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अपराधियों ने उमाकांत को निशाना बनाकर फायरिंग की और मौके पर ही उन्हें मौत की नींद सुला दिया। घटना को अंजाम देने के बाद तीनों हमलावर अपनी बाइक से तेजी से टाटा (जमशेदपुर) की ओर फरार हो गए।
जमीन विवाद से जुड़ रहे हैं तार
बताया जाता है कि उमाकांत महतो का उनके पैतृक गांव में जमीन को लेकर पिछले कई वर्षों से विवाद चल रहा था। इस विवाद में पूर्व में भी कई बार मारपीट और झड़प की घटनाएं हो चुकी थीं। पुलिस को अंदेशा है कि इसी पुरानी रंजिश के चलते हत्या की इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया है।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
उमाकांत की मौत की खबर मिलते ही उनकी पत्नी आशा महतो, पुत्र अनूप महतो और बड़े भाई सृष्टिपदो महतो सहित पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर में कोहराम मचा है और गांव के लोग शोक में डूबे हैं। भाजपा नेता होने के नाते स्थानीय राजनीतिक गलियारों में भी इस हत्या के बाद काफी आक्रोश है।
सीसीटीवी फुटेज से सुराग की तलाश
घटना के तुरंत बाद गालुडीह थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस को घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज हाथ लगे हैं, जो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहे हैं। फुटेज में अपराधियों की संदिग्ध गतिविधि दिख रही है।पुलिस ने जिले की सीमाओं को सील कर दिया है और अपराधियों की धरपकड़ के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और जमीन विवाद से जुड़े संदिग्ध लोगों के कॉल रिकॉर्ड्स की भी जांच कर रही है।
दहशत में गालुडीह के व्यवसायी
बस स्टैंड जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में भाजपा नेता की हत्या से स्थानीय व्यवसायियों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि हत्यारों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया जाए, अन्यथा वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
