
चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले को कुष्ठ मुक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। सोमवार को समाहरणालय स्थित सभागार कक्ष में उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में जिला समन्वय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले के सभी प्रखंड स्तरीय प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और स्वास्थ्य कार्यक्रम अधिकारी शामिल हुए।
30 जनवरी से शुरू होगा ‘स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान’
बैठक में निर्णय लिया गया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर 30 जनवरी से 14 फरवरी 2026 तक पूरे जिले में ‘स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान’ चलाया जाएगा। जिले के सभी गांवों में ग्राम गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा और कुष्ठ उन्मूलन की शपथ दिलाई जाएगी।स्कूलों में बच्चों के बीच विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा ताकि वे अपने परिवार और समाज को इस बीमारी के प्रति सचेत कर सकें।
घर-घर होगी कुष्ठ रोगियों की खोज
अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए 9 मार्च से 23 मार्च 2026 तक ‘कुष्ठ खोजी अभियान’ का दूसरा चरण शुरू होगा। पिछले 7 वर्षों के भीतर जिन गांवों से एक भी कुष्ठ रोगी मिला है, उन गांवों के हर घर में सहिया द्वारा सघन जांच अभियान चलाया जाएगा।शुरुआती लक्षणों वाले मरीजों की पहचान कर उन्हें विकलांगता से बचाना।
“एमडीटी से इलाज संभव, न छुपाएं लक्षण”: डॉ. भारती मिंज
सिविल सर्जन सह जिला कुष्ठ निवारण पदाधिकारी डॉ. भारती मिंज ने बैठक में महत्वपूर्ण चिकित्सकीय जानकारी साझा की।उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘एमडीटी’ दवा के नियमित सेवन से कुष्ठ रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है। यह एक ‘ड्रॉपलेट इन्फेक्शन’ है जो शरीर के तंत्रिका तंत्र, आंख, हाथ और पैरों को प्रभावित करता है। समय पर इलाज न होने पर स्थायी विकलांगता का खतरा रहता है।शरीर पर सुन्न दाग या किसी भी संदिग्ध लक्षण को छुपाएं नहीं, बल्कि तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।
बैठक में उपस्थिति
इस उच्च स्तरीय समन्वय बैठक में जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी उपस्थित थे, जिन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने और कुष्ठ रोगियों की पहचान में पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए गए।
