
रांची: झारखंड में आगामी चुनावों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार की चुनावी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार पर चुनाव प्रक्रिया में हेरफेर करने की कोशिश का आरोप लगाते हुए मांग की है कि मतदान केवल ईवीएम मशीनों के जरिए ही कराया जाना चाहिए।
बैलेट पेपर से चुनाव: निष्पक्षता पर उठाए सवाल
बाबूलाल मरांडी ने बैलेट पेपर (मतपत्र) से चुनाव कराने के सरकार के फैसले को लोकतंत्र के लिए पीछे की ओर मुड़ने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा बैलेट पेपर से चुनाव होने पर बूथ कैप्चरिंग और व्यापक गड़बड़ियों की संभावना बढ़ जाती है।मरांडी ने याद दिलाया कि पहले जब बैलेट पेपर से चुनाव होते थे, तब व्यापक धांधली देखने को मिलती थी। ईवीएम प्रणाली अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ईवीएम की जगह बैलेट पेपर का इस्तेमाल कर रही है ताकि नतीजों को प्रभावित किया जा सके।
‘अर्धसैनिक बलों की निगरानी में हो मतदान’
चुनाव में सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मरांडी ने राज्य निर्वाचन आयोग से एक महत्वपूर्ण मांग की है। उन्होंने कहा कि मतदान की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सभी मतदान केंद्रों पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती अनिवार्य की जानी चाहिए। इससे मतदाता बिना किसी डर या दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।
दलगत आधार पर चुनाव की मांग
मरांडी ने इस बात पर भी जोर दिया कि चुनाव दलगत आधार पर कराए जाने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने समर्पित प्रत्याशियों को जिताने के लिए पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगी। उन्होंने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया आवश्यक है, जिस पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए।
