
जमशेदपुर:लौहनगरी जमशेदपुर का सोनारी स्थित दोमोहानी संगम घाट महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भक्ति और अध्यात्म के चरम पर नजर आया। इस विशेष उपलक्ष्य पर यहाँ काशी (वाराणसी) की तर्ज पर भव्य गंगा आरती का आयोजन किया गया, जिसने पूरे वातावरण को शिवमय बना दिया। पहली बार इतने विशाल स्तर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने शहरवासियों को बनारस के घाटों की अनुभूति कराई।
21 पंडितों ने मंत्रोच्चार के साथ उतारी आरती
शाम होते ही पूरा संगम तट वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद से गूंज उठा। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 21 विद्वान पंडितों द्वारा की गई महाआरती थी। पारंपरिक परिधानों में सजे पंडितों ने जब एक साथ पीतल के बड़े दीपों से आरती शुरू की, तो दृश्य अत्यंत मनोरम हो गया। धूप-दीप की सुगंध और भजनों की गूंज ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विद्युत सज्जा और भव्य आतिशबाजी
आयोजन के लिए संगम घाट को आकर्षक विद्युत सज्जा और ताजे फूलों से सजाया गया था। आरती के समापन पर आसमान रंग-बिरंगी आतिशबाजी से नहा उठा। दीपों की कतारों और आतिशबाजी की रोशनी ने मिलकर एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया, जिसे हजारों श्रद्धालुओं ने अपने कैमरों में कैद किया।हमारा उद्देश्य जमशेदपुर के इस पवित्र संगम स्थल को आध्यात्मिक पहचान दिलाना है। महाशिवरात्रि पर काशी की तर्ज पर आरती का यह आयोजन समाज में सुख-समृद्धि और शांति की कामना के लिए किया गया है :आयोजन समिति
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुरक्षा
घाट पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे, जिन्होंने हाथों में दीप लेकर मां गंगा और भगवान भोलेनाथ की वंदना की। सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलिस प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवकों ने पुख्ता इंतजाम किए थे। ‘हर-हर महादेव’ और ‘गंगा मैया की जय’ के जयकारों से पूरा सोनारी क्षेत्र गुंजायमान रहा।
