
जमशेदपुर: मजदूरों के लोकप्रिय नायक और प्रखर नेता स्वर्गीय केदार दास की 45वीं पुण्यतिथि गुरुवार को साकची गोलचक्कर पर श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। एटक कोल्हान प्रमंडल द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पूरे कोल्हान क्षेत्र से सैकड़ों की संख्या में मजदूर नेता और श्रमिक साथी अपने नेता को याद करने पहुंचे।
पुष्पांजलि और मौन श्रद्धांजलि
समारोह का शुभारंभ केदार दास की तस्वीर पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर किया गया। इस दौरान वहां मौजूद जनसमूह ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत नेता को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने उनके जीवन के अनछुए पहलुओं को साझा करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन श्रमिकों के हक और सम्मान की लड़ाई के लिए समर्पित कर दिया था।
मजदूर आंदोलन के स्तंभ थे केदार दास: अंबुज ठाकुर
सभा को संबोधित करते हुए प्रमुख नेता अंबुज ठाकुर ने कहा कि केदार दास केवल एक नेता नहीं, बल्कि कोल्हान में मजदूर आंदोलन की एक विचारधारा थे। उन्होंने कहा आज जब श्रम कानूनों में बदलाव और श्रमिकों के अधिकारों पर वैश्विक चुनौतियां मंडरा रही हैं, ऐसे समय में केदार दास के सिद्धांत और उनका संघर्ष और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है। उन्होंने हमें सिखाया कि संगठित रहकर ही बड़े से बड़ा अधिकार हासिल किया जा सकता है।
श्रमिक हितों की रक्षा का संकल्प
उपस्थित अन्य यूनियन पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे और इस बात पर जोर दिया कि केदार दास ने कोल्हान की धरती पर मजदूर एकता की जो नींव रखी थी, उसे टूटने नहीं दिया जाएगा। कार्यक्रम में मजदूरों की भारी उपस्थिति यह दर्शाने के लिए काफी थी कि वे आज भी श्रमिकों के दिलों में जीवित हैं।कार्यक्रम के समापन पर सभी ने एक स्वर में केदार दास के आदर्शों पर चलने और मजदूर आंदोलन को और अधिक तीव्र करने का सामूहिक संकल्प लिया।
