जमशेदपुर: भारतीय रेलवे के लाखों कर्मचारियों के लिए एक सुखद खबर सामने आई है। अब रेलवे अस्पतालों में नवजात शिशुओं के इलाज के लिए (उम्मीद) कार्ड की अनिवार्यता बाधा नहीं बनेगी। रेलवे बोर्ड ने कर्मचारी यूनियनों और फेडरेशन की मांग पर विचार करते हुए शिशुओं के तत्काल उपचार के लिए नियमों में लचीलापन लाने के निर्देश दिए हैं।
क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
वर्तमान नियमों के अनुसार, रेलवे चिकित्सा सुविधाओं का लाभ लेने के लिए ‘उम्मीद’ कार्ड होना अनिवार्य है। लेकिन, नवजात शिशुओं के मामले में कार्ड बनने में समय लगता है, जिससे आपातकालीन स्थिति में उनके इलाज में तकनीकी दिक्कतें आ रही थीं। रेलवे बोर्ड के साथ हुई हालिया बैठक में फेडरेशन नेताओं ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। कार्ड के अभाव में कई बार गंभीर रूप से बीमार नवजात बच्चों को समय पर चिकित्सा सहायता मिलने में देरी हो रही थी।
HMIS में तत्काल जोड़ने का प्रावधान
बैठक में यह मांग उठी कि (हॉइंफॉर्मेशन सिस्टम) स्पिटल मैनेजमेंट में रेल कर्मचारियों के नवजात शिशुओं को जोड़ने का तत्काल प्रावधान किया जाए। इस नई व्यवस्था के तहत, जन्म के तुरंत बाद बिना ‘उम्मीद’ कार्ड के भी शिशु का विवरण सिस्टम में दर्ज किया जा सकेगा।इससे कर्मचारियों को अपने बच्चों के इलाज के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने या कार्ड का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी।
चक्रधरपुर मंडल के कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ
जमशेदपुर (टाटानगर) समेत चक्रधरपुर मंडल के हजारों रेल कर्मियों के लिए यह फैसला संजीवनी की तरह है। मंडल के अस्पतालों में अब शिशुओं को बिना किसी कागजी देरी के बेहतर इलाज मिल सकेगा। फेडरेशन नेताओं का कहना है कि यह निर्णय कर्मचारियों के कल्याण की दिशा में एक मानवीय और सराहनीय कदम है।
क्या है उम्मीद कार्ड?
यूएमआईडी कार्ड रेलवे कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए एक स्मार्ट हेल्थ कार्ड है, जिसके जरिए वे देश भर के किसी भी रेलवे अस्पताल या पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा पा सकते हैं।
