
चाईबासा: झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के टोन्टो प्रखंड स्थित बुंडू गाँव में एक परिवार के चार सदस्यों ने दो साल बाद अपने मूल धर्म और संस्कृति में वापसी की है। सोमवार को आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा के पदाधिकारियों और ग्राम मुंडा की उपस्थिति में पारंपरिक विधि-विधान के साथ इस परिवार का शुद्धिकरण किया गया।
बीमारी ठीक होने के नाम पर किया था धर्म परिवर्तन
ग्रामीणों और आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार, यह परिवार लगभग दो वर्ष पूर्व ईसाई धर्म में शामिल हो गया था।परिवार के सदस्यों को उम्मीद दी गई थी कि धर्म परिवर्तन से उनकी बीमारियां ठीक हो जाएंगी और घर की स्थिति सुधरेगी। परिवार का कहना है कि दो साल बीत जाने के बाद भी न तो स्वास्थ्य में कोई सुधार हुआ और न ही आर्थिक स्थिति बदली। इसके बाद उन्होंने पुनः अपनी मूल प्राकृतिक आस्था ‘सरना’ की ओर लौटने की इच्छा जताई।
पारंपरिक विधि-विधान से हुआ शुद्धिकरण
आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा के नेतृत्व में बुंडू गाँव के मुंडा (ग्राम प्रधान) और दियुरी (पुजारी) ने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए। ‘हो’ समाज के रीति-रिवाजों के अनुसार परिवार का शुद्धिकरण किया गया। परिवार ने अपनी मूल संस्कृति और प्राकृतिक पूजा पद्धति पर पूर्ण विश्वास जताते हुए समाज की मुख्यधारा में वापसी की।इस मौके पर आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा के कई पदाधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
आदिवासी समाज का संदेश
आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा के पदाधिकारियों ने इस अवसर पर कहा कि अपनी संस्कृति और पूर्वजों की परंपरा ही हमारी पहचान है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में आकर अपनी जड़ों को न छोड़ें। समाज ने वापसी करने वाले परिवार का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें हर संभव सामाजिक सहयोग का आश्वासन दिया।
