जमशेदपुर: दक्षिण पूर्व रेलवे के महत्वपूर्ण जंक्शन टाटानगर में ट्रेनों की लेटलतीफी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को भी कई प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनें घंटों देरी से स्टेशन पहुंचीं, जिससे यात्रियों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ा। यात्रियों का आरोप है कि रेलवे राजस्व के लालच में मालगाड़ियों को प्राथमिकता दे रहा है और यात्री ट्रेनों की लगातार उपेक्षा की जा रही है।
शुक्रवार को लेट होने वाली प्रमुख ट्रेनें
आज टाटानगर पहुंचने वाली कई महत्वपूर्ण ट्रेनों के पहिए थमे रहे, जिनमें गीतांजलि एक्सप्रेस ,अहमदाबाद एक्सप्रेस, कुर्ला (एलटीटी ) एक्सप्रेस,साउथ बिहार एक्सप्रेस,छपरा एक्सप्रेस, एर्नाकुलम एक्सप्रेस शामिल हैं। इनके अलावा कई अन्य पैसेंजर और इंटरसिटी ट्रेनें भी अपने निर्धारित समय से काफी पीछे चल रही थीं।
50 किमी की दूरी तय करने में लग रहे 4 घंटे
यात्रियों ने रेलवे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शिकायतों के अनुसार ट्रेनों को टाटानगर पहुंचने से ठीक पहले छोटे स्टेशनों, केबिन या आउटर पर बेवजह घंटों खड़ा कर दिया जाता है। मालगाड़ियों को रास्ता देने के लिए सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनों को लूप लाइन में डाल दिया जाता है।स्थिति यह है कि महज 40-50 किलोमीटर की दूरी तय करने में ट्रेनों को तीन से चार घंटे का समय लग रहा है।
सोशल मीडिया और स्टेशन डायरी में शिकायतों की बाढ़
ट्रेनों के लेट होने से नाराज यात्री अब डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा ले रहे हैं। बड़ी संख्या में यात्रियों ने रेल मंत्रालय और डीआरएम चक्रधरपुर को टैग करते हुए अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं।टाटानगर स्टेशन पर रखी शिकायत पुस्तिका भी यात्रियों के गुस्से से भरी पड़ी है।यात्रियों का कहना है कि वे समय पर गंतव्य तक पहुंचने के लिए भारी किराया चुकाते हैं, लेकिन रेलवे के कुप्रबंधन के कारण उनकी यात्रा कष्टकारी होती जा रही है।
