विष्णुगढ़ हत्याकांड का पर्दाफाश: 12 साल की बच्ची की मौत का राज खुला, तंत्र-मंत्र के नाम पर हुई थी निर्मम हत्या

हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के कुसुम्बा गांव में हुई 12 वर्षीय मासूम बच्ची की निर्मम हत्या का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। इस जघन्य हत्याकांड की पटकथा अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के खौफनाक ताने-बाने से बुनी गई थी, जिसमें रोंगटे खड़े कर देने वाली बात यह है कि मासूम की अपनी सगी मां भी इस कृत्य में शामिल थी।

बेटे की सेहत के लिए ‘बेटी’ की बलि

हजारीबाग आईजी और पुलिस अधीक्षक ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि यह घटना समाज के माथे पर कलंक है। पुलिस जांच के अनुसार गांव की भगतिनी शांति देवी ने मृतका की मां को भ्रमित किया कि उसकी बेटी पर ‘भूत’ का साया है। भगतिनी ने मां को विश्वास दिलाया कि यदि वह अपने बेटे की बेहतर सेहत चाहती है, तो उसे एक ‘कुंवारी लड़की’ की बलि देनी होगी। इसी लालच और अंधविश्वास में अंधी होकर मां अपनी ही बेटी को मौत के मुँह में ले गई।

रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात का घटनाक्रम

पुलिस की विशेष जांच टीम ने परत-दर-परत इस साजिश का खुलासा किया। रात करीब 9:30 बजे मां अपनी बेटी को लेकर भगतिनी के घर स्थित मनसा मंदिर पहुँची। वहां बच्ची को सिंदूर का टीका और काजल लगाकर तांत्रिक पूजा शुरू की गई।पूजा के बाद बच्ची को पास के बांसवाड़ी ले जाया गया। वहां भगतिनी ने दावा किया कि उस पर ‘देवी’ आ गई है और उसे खून चाहिए। आरोपी भीम राम ने बच्ची का गला दबाया, जबकि सगी मां ने अपनी ही बेटी के दोनों पैर मजबूती से पकड़ रखे थे ताकि वह छटपटा न सके। मौत के बाद भी दरिंदगी नहीं थमी। भगतिनी के इशारे पर बच्ची के शव के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और पत्थर से प्रहार कर उसका सिर फाड़ दिया गया। भगतिनी ने उस खून का उपयोग अपने अनुष्ठान और मंदिर में छिड़काव के लिए किया।

मां समेत तीन आरोपी सलाखों के पीछे

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस जघन्य कांड में शामिल तीनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है जिसमें भीम राम (45 वर्ष) जिसने गला दबाकर हत्या की,रेशमी देवी (35 वर्ष) मृतका की मां, जिसने इस कृत्य में सहयोग किया।शांति देवी उर्फ भगतिनी (55 वर्ष) जिसने तंत्र-मंत्र के नाम पर इस पूरी साजिश को रचा।

विशेष टीम की बड़ी सफलता

इस चर्चित हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए आईपीएस अधिकारी नागरगोजे शुभम भाउसाहेब के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया था। टीम में एसडीपीओ बैद्यनाथ प्रसाद, डीएसपी अनुभव भारद्वाज और तकनीकी शाखा के विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इस जघन्य अपराध का उद्भेदन किया।हजारीबाग पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे ऐसे अंधविश्वास और ढोंगी तांत्रिकों के झांसे में न आएं। इस घटना ने एक बार फिर समाज में व्याप्त कुरीतियों और शिक्षा की कमी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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