सरायकेला: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले की सांस्कृतिक धरोहर और विश्व प्रसिद्ध छऊ नृत्य के महापर्व ‘चैत्र पर्व’ का रविवार को विधिवत शुभारंभ हो गया। स्थानीय राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के कलाकारों ने परंपरागत भैरव पूजा के साथ इस भव्य उत्सव की शुरुआत की।
भैरव पूजा के साथ हुआ शुभारंभ
इस अवसर पर सरायकेला के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) अभिनव प्रकाश मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने विधि-विधान और परंपरा के अनुसार भगवान भैरव की पूजा-अर्चना कर जिले की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। पूजा के दौरान पूरा माहौल भक्तिमय और उत्साहपूर्ण बना रहा।
जनप्रतिनिधियों ने बताई छऊ की महत्ता
कार्यक्रम में नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी और उपाध्यक्ष अविनाश कवि भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि चैत्र पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सरायकेला की पहचान और आत्मा है, जो इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाता है।
कलाकारों में दिखा उत्साह
राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के निदेशक और कलाकारों में इस पर्व की शुरुआत को लेकर खासा उत्साह देखा गया। इस मौके पर पद्मश्री छऊ गुरु बजेंद्र पट्टनायक सहित केंद्र के कई वरिष्ठ गुरु और बड़ी संख्या में प्रशिक्षु कलाकार उपस्थित थे।गुरुओं ने बताया कि भैरव पूजा के साथ ही कलाकार अब कठिन साधना और छऊ नृत्य के विभिन्न पारंपरिक मुखौटों के साथ प्रदर्शन की तैयारी में जुट जाएंगे।
सरायकेला में चैत्र पर्व का विशेष महत्व
सरायकेला में चैत्र पर्व का विशेष महत्व है। यह पर्व वसंत ऋतु के विदा होने और नए वर्ष के आगमन का प्रतीक माना जाता है।आने वाले दिनों में यहां पारंपरिक कलश यात्रा और भव्य छऊ महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश-विदेश से पर्यटक, कला प्रेमी और शोधकर्ता बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।
