जमशेदपुर: जमशेदपुर के छोटा गोविंदपुर स्थित एलआईजी हाउसिंग कॉलोनी में रहने वाले करीब 70 परिवारों के बीच उस समय हड़कंप मच गया, जब झारखंड हाउसिंग बोर्ड की ओर से उनके घरों तक मकान खाली करने का नोटिस पहुंचा। नोटिस में सभी परिवारों को 15 दिनों के भीतर फ्लैट खाली कर विभाग को सूचित करने का आदेश दिया गया है।यह नोटिस मिलने के बाद कॉलोनी में रहने वाले लोगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है, क्योंकि इनमें से अधिकांश परिवार पिछले 40 से 50 वर्षों से इन फ्लैटों में रह रहे हैं।
समस्या को लेकर हाउसिंग बोर्ड के कार्यपालक अभियंता से मिले लोग
नोटिस मिलने के बाद कॉलोनी के करीब 70 परिवारों के लोग झारखंड हाउसिंग बोर्ड के कार्यपालक अभियंता से मिलने पहुंचे और अपनी समस्या से अवगत कराया। लोगों ने बताया कि वे कई दशकों से इन फ्लैटों में रह रहे हैं और अब अचानक मकान खाली करने का आदेश मिलने से उनके सामने रहने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।लोगों ने विभाग से अनुरोध किया कि उन्हें फ्लैट खाली कराने के बजाय नियमित (रेगुलर) किया जाए, ताकि वे पहले की तरह वहां रह सकें।
आवेदन देने को कहा गया, फ्लैट नियमित करने का आश्वासन
लोगों की समस्या सुनने के बाद कार्यपालक अभियंता ने उन्हें आश्वस्त किया कि जो लोग जिस फ्लैट में रह रहे हैं, उसका पूरा विवरण देते हुए विभाग को आवेदन दें। इसके बाद विभाग मामले की जांच कर फ्लैट को नियमित करने की प्रक्रिया पर विचार करेगा।इस आश्वासन के बाद कॉलोनी के लोगों ने थोड़ी राहत की सांस ली।
लोग बोले – सरकार का राजस्व देने को तैयार
कॉलोनी में रहने वाले लोगों का कहना है कि सरकार का जो भी राजस्व बनता है, वे उसे देने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनसे मकान खाली नहीं करवाया जाए। लोगों ने यह भी कहा कि पहले विभाग ने जो मूल्य तय किया था, उसी के आधार पर वे राशि जमा करने को तैयार हैं।स्थानीय लोगों के अनुसार वे कई वर्षों से इस कॉलोनी में रह रहे हैं और कॉलोनी का रखरखाव और मेंटेनेंस भी खुद ही करते हैं।
विभाग बोला – रिकॉर्ड में फ्लैट खाली दिख रहा
इस मामले में हाउसिंग बोर्ड के कार्यपालक अभियंता ने बताया कि विभाग के रिकॉर्ड में वहां के कई फ्लैट खाली दिखाए गए हैं, लेकिन जब मौके पर जांच की गई तो पाया गया कि इन फ्लैटों में लंबे समय से लोग रह रहे हैं।उन्होंने बताया कि इसी कारण सभी को नोटिस भेजकर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। फ्लैट में रहने वाले लोग अपना पक्ष रखेंगे, जिसके बाद इसकी रिपोर्ट विभाग को भेजी जाएगी।
एमडी के आदेश के बाद होगा अंतिम फैसला
कार्यपालक अभियंता ने कहा कि सभी लोगों का पक्ष जानने के बाद विभाग के एमडी (मैनेजिंग डायरेक्टर) के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि आदेश मिलता है तो फ्लैटों को नियमित करने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।
