जमशेदपुर : लौहनगरी को ओडीएफ मुक्त बनाए रखने के उद्देश्य से निर्मित सामुदायिक शौचालयों की स्थिति अब विभागीय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है। ताजा मामला मानगो वर्कर्स कॉलेज के पास स्थित सामुदायिक शौचालय का है, जहाँ जीर्णोद्धार कार्य में भारी अनियमितता और घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगा है।
विधायक निधि के कार्य में ‘कमीशन’ और ‘लापरवाही’ का खेल
मानगो नगर निगम द्वारा क्रियान्वित की जा रही इस योजना में स्थानीय लोगों और भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि मानगो नगर निगम में पदस्थापित कनीय अभियंता सुबोध प्रसाद स्वयं इस कार्य में संवेदक की भूमिका निभा रहे हैं। सरकारी फाइलों में नाम होने के बावजूद निर्माण कार्य की गुणवत्ता से खिलवाड़ किया जा रहा है। बिना पुराना प्लास्टर हटाए ही दीवारों पर नॉन-ब्रांडेड और निम्न स्तर के टाइल्स लगाए जा रहे थे। स्थानीय लोगों की शिकायत पर जब जांच हुई, तो भ्रष्टाचार की परतें खुलने लगीं।
उपायुक्त के संज्ञान के बाद रातों-रात उखाड़े गए टाइल्स
मामले की गंभीरता को देखते हुए विकास सिंह ने कनीय अभियंता, सहायक अभियंता, नगर आयुक्त और पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को साक्ष्यों के साथ जानकारी दी।जैसे ही मामला उपायुक्त कार्यालय तक पहुँचा और जांच की सुगबुगाहट शुरू हुई, संवेदक ने रातों-रात घटिया टाइल्स को उखाड़ने का काम शुरू कर दिया ताकि सबूत मिटाए जा सकें। पिछले एक महीने से शौचालय का काम अधर में लटका हुआ है। नदी किनारे बना यह महत्वपूर्ण शौचालय बंद होने से स्थानीय निवासियों और राहगीरों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
“विधायक के कार्यकर्ता हैं संवेदक” – इंजीनियर का तर्क
हैरानी की बात यह है कि कनीय अभियंता सुबोध प्रसाद ने कथित तौर पर यह दलील दी कि फाइल में उनका नाम जरूर है, लेकिन वास्तविक संवेदक विधायक के कार्यकर्ता हैं। इस कारण वे गुणवत्ता को लेकर कड़ाई से पेश नहीं आ पा रहे हैं। यह बयान सीधे तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक दबाव के बीच के गठजोड़ को उजागर करता है।
दंडात्मक कार्रवाई की मांग
विकास सिंह ने उपायुक्त से मांग की है कि कनीय अभियंता सुबोध प्रसाद के खिलाफ भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और पद के दुरुपयोग हेतु कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।शौचालय का जीर्णोद्धार प्राक्कलन के अनुसार गुणवत्तापूर्ण तरीके से जल्द पूरा कराया जाए ताकि ओडीएफ मुक्त जिले की गरिमा बनी रहे।
