जमशेदपुर : परसुडीह थाना क्षेत्र में 26 मार्च को हुई रियान की संदिग्ध मृत्यु का मामला अब जनाक्रोश में बदलता दिख रहा है। हत्या की प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद पुलिस के खाली हाथ कई सवाल खड़े कर रहे हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपियों को खुला संरक्षण मिल रहा है, जिसके कारण अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
क्या है पूरा मामला?
26 मार्च 2026 को रियान की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हुई थी। परिजनों ने 27 मार्च को परसुडीह थाना में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) (हत्या) के तहत नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।25 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने इस मामले में एक भी गिरफ्तारी नहीं की है।
न्याय के लिए एसपी कार्यालय की चौखट पर परिवार
पीड़ित परिवार का कहना है कि वे न्याय की उम्मीद में लगातार पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। परिजनों ने मीडिया को बताया “हमें केवल आश्वासन मिल रहा है, कार्रवाई नहीं। प्राथमिकी में नामजद आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे हमारे परिवार की सुरक्षा पर भी खतरा बना हुआ है। आखिर पुलिस किस दबाव में आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर रही है?”
स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ आक्रोश
इस मामले में केवल परिवार ही नहीं, बल्कि स्थानीय नागरिक भी लामबंद हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि पुलिस की यह कार्यशैली अपराधियों के हौसले बुलंद कर रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सवाल किया है कि सीसीटीवी फुटेज और नामजद शिकायत के बावजूद जांच की प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों है? यदि जल्द ही दोषियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो स्थानीय लोग उग्र आंदोलन और थाना घेराव करने के लिए मजबूर होंगे।
पीड़ित परिवार की मुख्य मांगें
प्राथमिकी में नामजद सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए।मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी की देखरेख में हो ताकि सच सामने आ सके। हत्या जैसी जघन्य वारदात को अंजाम देने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो।
