जमशेदपुर सिक्का संग्रहालय: दो पैसे में पूरी-सब्जी और जलेबी का दौर; स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के बच्चों ने जाना सिक्कों का गौरवशाली इतिहास

जमशेदपुर: एग्रिको-सिदगोड़ा स्थित एसडीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के कक्षा 7 के करीब 90 विद्यार्थियों ने आज जमशेदपुर सिक्का संग्रहालय का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान बच्चों ने वैदिक काल से लेकर आधुनिक भारत तक के सिक्कों के क्रमिक विकास को बारीकी से समझा।

दादी के दौर की यादें और ‘दो पैसे’ का मूल्य

संग्रहालय में चर्चा के दौरान पुराने दौर की आर्थिक व्यवस्था के रोचक किस्से साझा किए गए। 1950 के दशक का जिक्र करते हुए बताया गया कि उस समय दो पैसे की कीमत इतनी थी कि उसमें सुबह का नाश्ता (पूरी-सब्जी और जलेबी) भरपेट मिल जाता था।संग्रहालय में एक पैसे से लेकर एक हजार रुपये तक के दुर्लभ सिक्कों को प्रदर्शित किया गया है, जिन्हें देखकर बच्चे अचंभित रह गए।

रोचक वर्कशॉप और शिक्षकों का मार्गदर्शन

आज के दौर में स्कूलों में प्रोजेक्ट और वर्कशॉप का महत्व बढ़ गया है। इसी कड़ी में बच्चों के साथ उनके विषय शिक्षक रेनू सिंह, एकता और विजय भूषण भी मौजूद रहे। छात्र-छात्राओं ने अपनी पाठ्यपुस्तकों में पढ़े गए सिक्कों का वास्तविक अवलोकन किया और अपनी नोटबुक में महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज कीं। सिक्कों के बारे में विस्तृत वर्णन कॉइन कलेक्टर्स क्लब के जनरल सेक्रेटरी श्री प्रेम पीयूष कुमार द्वारा दिया गया।

बच्चों को ‘सिक्का संग्रह’ के लिए किया गया प्रेरित

प्रेम पीयूष कुमार ने बच्चों को ‘न्यूमिस्मैटिक्स’ (सिक्कों का अध्ययन) के प्रति प्रोत्साहित करते हुए एक विशेष सुझाव दिया।”यदि आपके दादा-दादी या माता-पिता के पास पुराने जमाने के सिक्के या ‘चिल्ड्रन पैसे’ (पुराने छोटे सिक्के) रखे हों, तो उन्हें सहेजें और अपना खुद का कलेक्शन शुरू करें।”

झारखंड का इकलौता नॉन-प्रॉफिट सिक्का संग्रहालय

जमशेदपुर सिक्का संग्रहालय पूरे राज्य का एकमात्र ऐसा संग्रहालय है जो नॉन-प्रॉफिट आधार पर संचालित होता है। इसे कॉइन कलेक्टर्स क्लब द्वारा चलाया जाता है।इसका मुख्य उद्देश्य जमशेदपुर और आसपास के स्कूली छात्र-छात्राओं के ज्ञान में वृद्धि करना और उन्हें भारतीय मुद्रा के समृद्ध इतिहास से रूबरू कराना है।

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