जमशेदपुर : बुधवार को लौहनगरी की सड़कों पर अचानक पेट्रोल-डीजल के लिए हाहाकार मच गया। शहर के विभिन्न हिस्सों में वाहनों की किलोमीटर लंबी कतारें देखी गईं। हालांकि, जब इसकी गहराई से जांच की गई, तो इसके पीछे दो मुख्य कारण सामने आए:
शनिवार-रविवार की बैंक बंदी और पेमेंट में देरी
पेट्रोल पंपों पर स्टॉक खत्म होने का एक बड़ा तकनीकी कारण बैंकिंग हॉलिडे रहा।शनिवार और रविवार को बैंक बंद होने के कारण कई पेट्रोल पंप संचालक तेल कंपनियों को अगले स्टॉक के लिए समय पर भुगतान नहीं कर पाए। कंपनियों तक पैसा देरी से पहुंचने के कारण तेल के टैंकरों की लोडिंग में विलंब हुआ, जिससे बुधवार सुबह तक शहर के कुछ चुनिंदा पंपों का स्टॉक पूरी तरह समाप्त हो गया। इसी ‘ड्राई’ स्थिति को देख लोगों में डर फैल गया।
प्रधानमंत्री का संबोधन और ‘पैनिक बाइंग’
पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम पदार्थों की सीमित उपलब्धता को देखते हुए देशवासियों से ईंधन की मितव्ययिता (कम खर्च) की अपील की थी। पीएम मोदी ने लोगों को भविष्य की चुनौतियों के लिए सचेत किया था, लेकिन शहरवासियों ने इसे ‘तेल खत्म होने वाला है’ के संकेत के रूप में ले लिया। प्रधानमंत्री के कथन और कुछ पंपों पर तेल खत्म होने की खबर मिलते ही लोगों में ‘पैनिक बाइंग’ शुरू हो गई। लोग अपनी जरूरत से ज्यादा तेल स्टॉक करने के लिए पंपों पर टूट पड़े, जिससे स्थिति नियंत्रण से बाहर दिखने लगी।
पंप संचालकों की स्पष्टीकरण: “तेल की कमी नहीं है”
जमशेदपुर के पेट्रोल पंप संचालकों और एसोसिएशन ने शहरवासियों को आश्वस्त किया है कि पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है। जिन पंपों पर बुधवार को तेल नहीं पहुँच पाया था, वहां शाम तक या गुरुवार सुबह तक टैंकर पहुँचने की पूरी संभावना है।संचालकों ने ग्राहकों से अनुरोध किया है कि वे सामान्य रूप से ईंधन लें। टैंक फुल कराने की होड़ और अफरा-तफरी के कारण ही कतारें लंबी हो रही हैं।
प्रशासन और पुलिस की नजर
भीड़ को देखते हुए कई पेट्रोल पंपों पर स्थानीय पुलिस को तैनात करना पड़ा ताकि यातायात और कानून-व्यवस्था बनी रहे। जिला प्रशासन भी तेल कंपनियों के डिपो (जसीडीह/हल्दिया) के संपर्क में है ताकि कोल्हान में आपूर्ति श्रृंखला को और तेज किया जा सके।
