सरायकेला: अमलगम स्टील के गेट पर विस्थापितों का हल्ला बोल, 13 साल बाद भी रोजगार को तरस रहे कालिंदी परिवार

कांड्रा : कांड्रा स्थित अमलगम स्टील प्लांट के मुख्य द्वार पर आज विस्थापितों के आक्रोश का सैलाब उमड़ पड़ा। हाथों में तख्तियां लिए और जमीन वापसी या रोजगार के नारे लगाते प्रदर्शनकारियों ने कंपनी प्रबंधन और जिला प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया है।

वादों की जमीन पर बेरोजगारी का साया

प्रदर्शन कर रहे कालिंदी परिवारों का कहना है कि वर्ष 2003 में जब यह उद्योग स्थापित हो रहा था, तब विकास और स्थानीय युवाओं को नौकरी देने का सुनहरा सपना दिखाया गया था।ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी उपजाऊ जमीनें यह कहकर ले ली गईं कि परिवार के सदस्यों को स्थाई रोजगार मिलेगा।13 साल बीत जाने के बाद भी अधिकांश विस्थापित परिवार आज भी बेरोजगार हैं और मजदूरी कर जीवन यापन करने को मजबूर हैं।

“कंपनी को मुनाफा, हमें सिर्फ धुआं”

धरने पर बैठी महिलाओं ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि कंपनी पिछले कई वर्षों से लगातार उत्पादन कर मुनाफा कमा रही है, लेकिन जिन लोगों ने इस उद्योग के लिए अपना घर और खेत कुर्बान कर दिया, उनके भविष्य को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे प्रदूषण और शोर तो झेल रहे हैं, लेकिन जब हक की बात आती है तो प्रबंधन चुप्पी साध लेता है।

जिला प्रशासन की ‘चुप्पी’ पर सवाल

प्रदर्शनकारियों ने केवल कंपनी ही नहीं, बल्कि झारखंड सरकार और जिला प्रशासन के प्रति भी कड़ा रोष जताया। विस्थापितों का कहना है कि जिला प्रशासन केवल आश्वासन का झुनझुना थमाता रहा है। कई बार वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जमीन अधिग्रहण के समय प्रशासन कंपनी के साथ सक्रिय था, तो अब प्रभावित परिवारों के अधिकारों के लिए खामोश क्यों है?

‘रोजगार दो या जमीन वापस करो’

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब वे खोखले आश्वासनों के झांसे में नहीं आएंगे। उनकी दो टूक मांग है। विस्थापित परिवारों के योग्य सदस्यों को अविलंब कंपनी में स्थाई रोजगार दिया जाए।यदि रोजगार देना मुमकिन नहीं है, तो उनकी जमीनें वापस की जाएं।

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