ट्रेनों की लेटलतीफी और रेलवे की तानाशाही के खिलाफ साकची में हस्ताक्षर अभियान; सरयू राय बोले— “यात्रियों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं, तय हो जवाबदेही”

जमशेदपुर: टाटानगर रेलवे स्टेशन से सफर करने वाले हजारों रेल यात्रियों की समस्याओं को लेकर आज साकची के व्यस्ततम केंद्र में एक जन आंदोलन का आगाज हुआ। रेल यात्री संघर्ष समिति द्वारा आयोजित इस ‘हस्ताक्षर अभियान’ में आम नागरिकों, दैनिक यात्रियों और व्यापारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और रेलवे के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे विधायक सरयू राय

इस जन आंदोलन को धार देने और आम जनता की आवाज बुलंद करने के लिए जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक व पूर्व मंत्री सरयू राय मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए।हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत करते हुए सरयू राय ने रेल प्रशासन की संवेदनहीनता पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दक्षिण पूर्व रेलवे और टाटानगर रेल प्रबंधन द्वारा आम यात्रियों की बुनियादी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जो कि बेहद चिंताजनक है।विधायक ने रेल प्रशासन से मांग की कि सभी ट्रेनों की समयबद्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए।तकनीकी या अन्य कारणों के नाम पर ट्रेनों को घंटों लेट चलाने की प्रवृत्ति पर रोक लगे।यात्रियों को स्टेशनों और बोगियों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

आम जनता और यात्रियों का मिला भारी समर्थन

साकची में आयोजित इस अभियान के दौरान लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। हस्ताक्षर करने पहुंचे स्थानीय नागरिकों ने कहा कि पिछले कई महीनों से टाटानगर से खुलने वाली या यहाँ से गुजरने वाली कई महत्वपूर्ण ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों देरी से चल रही हैं। इसके कारण न केवल लोगों के जरूरी काम छूट रहे हैं, बल्कि कनेक्टिंग ट्रेनें छूटने से आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।यात्रियों का यह भी आरोप था कि शिकायत करने के बावजूद रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों का रवैया तानाशाही और संवेदनहीन बना रहता है।

“मांगें पूरी नहीं हुईं, तो चक्का जाम के लिए रहें तैयार”: संघर्ष समिति

हस्ताक्षर अभियान के समापन पर रेल यात्री संघर्ष समिति के मुख्य पदाधिकारियों ने रेलवे बोर्ड और स्थानीय प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी दी।समिति के सदस्यों ने कहा कि आज का यह हस्ताक्षर अभियान केवल एक शुरुआत है, जिसके जरिए रेल प्रशासन को अपनी नीतियां सुधारने का मौका दिया जा रहा है।यदि ट्रेनों के परिचालन और यात्री सुविधाओं में जल्द ही धरातल पर सुधार नजर नहीं आया, तो समिति इस जन आंदोलन को उग्र रूप देने से पीछे नहीं हटेगी। आने वाले दिनों में स्टेशनों पर धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम जैसी रणनीतियों पर भी विचार किया जा रहा है।

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