जमशेदपुर:परसुडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत पुरानी सरजमदा के शीतला नगर में मंगलवार को उस वक्त माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया, जब चार दिवसीय हरि कीर्तन के समापन समारोह के दौरान एक नाबालिग बच्चे पर लोहे की रॉड से जानलेवा हमला कर दिया गया। इस घटना के बाद तब और बड़ा बवाल खड़ा हो गया, जब ग्रामीणों ने परसुडीह पुलिस पर आरोपी को हिरासत में लेने के बाद साठगांठ कर रास्ते में ही छोड़ देने का बेहद गंभीर आरोप लगाया।
नशे की हालत में 15 वर्षीय किशोर पर रॉड से वार
स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, शीतला नगर इलाके में बीते 16 मई से 19 मई (मंगलवार) तक भव्य हरि कीर्तन का आयोजन चल रहा था। मंगलवार को जब कीर्तन का समापन हो रहा था और श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे थे, तभी वहां अचानक विवाद खड़ा हो गया।आरोप है कि स्थानीय युवक रामेश्वर बादुक ने अत्यधिक नशे की हालत में आकर वहां मौजूद एक 15 वर्षीय नाबालिग किशोर पर लोहे की रॉड से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस अचानक हुए हमले में किशोर के सिर और पीठ पर गहरी चोटें आई हैं और वह लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा। घटना के बाद कार्यक्रम स्थल पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने आनन-फानन में घायल किशोर को इलाज के लिए खासमहल स्थित सदर अस्पताल भिजवाया।
“पुलिस ने आरोपी को पकड़ा और रास्ते में ही छोड़ दिया”— ग्रामीण
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना परसुडीह थाना पुलिस को दी। इसके बाद जो हुआ, उसने पुलिस की कार्यशैली पर बड़े सुलगते सवाल खड़े कर दिए हैं।सूचना के बाद पुलिस की एक पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों के सहयोग से आरोपी रामेश्वर बादुक को हिरासत में ले लिया। लेकिन आरोप है कि पुलिस टीम आरोपी को थाने ले जाने के बजाय कुछ ही दूरी पर ले जाकर गाड़ी से चुपचाप छोड़ दी। जैसे ही यह बात सरजमदा के ग्रामीणों को पता चली, उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष और युवा सड़कों पर उतर आए और परसुडीह पुलिस के खिलाफ जोरदार नारेबाजी और प्रदर्शन शुरू कर दिया।
जेएमएम नेता संतोष ओझा के संगीन आरोप— “नशे में थे पुलिस पदाधिकारी”
बवाल की सूचना मिलने के बाद झामुमो नेता संतोष ओझा भी स्थानीय ग्रामीणों के समर्थन में सरजमदा पहुंचे। उन्होंने मीडिया और वरीय पुलिस अधिकारियों के सामने परसुडीह पुलिस की इस लापरवाही पर कई गंभीर आरोप मढ़े। संतोष ओझा ने कहा कि अगर समय रहते स्थानीय ग्रामीण बीच-बचाव नहीं करते, तो नशे में धुत आरोपी रामेश्वर बादुक उस नाबालिग की जान भी ले सकता था।उन्होंने आरोप लगाया कि जब बस्तीवासियों ने आरोपी को छोड़े जाने का विरोध किया, तो मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उल्टा ग्रामीणों को ही फर्जी केस में फंसा देने की धमकी दे डाली। झामुमो नेता ने एक और सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि हंगामे के वक्त मौके पर पहुंचे एक पुलिस पदाधिकारी खुद अत्यधिक नशे (शराब) की हालत में थे। जब माहौल बहुत ज्यादा बिगड़ने लगा और ग्रामीण उग्र होने लगे, तो पुलिस टीम अपनी गाड़ी लेकर वहां से चुपचाप निकल गई।
दोषियों की गिरफ्तारी और लापरवाह पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग
फिलहाल इस पूरे वाक्ये के बाद पुरानी सरजमदा और शीतला नगर इलाके में पुलिस के प्रति भारी आक्रोश है और कानून व्यवस्था को लेकर माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। स्थानीय समाजसेवियों और ग्रामीणों ने जिला पुलिस मुख्यालय (एसएसपी) से दो प्रमुख मांगें रखी हैं जिसमें मुख्य रूप से नाबालिग पर जानलेवा हमला करने वाले मुख्य आरोपी रामेश्वर बादुक को पुलिस तत्काल गिरफ्तार करे और ऑन-ड्यूटी लापरवाही बरतने, आरोपी को भगाने और ग्रामीणों को डराने वाले संबंधित पुलिस पदाधिकारियों की मेडिकल जांच कराकर उन पर तत्काल विभागीय व सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
पुलिस का पक्ष
मामले के तूल पकड़ने के बाद परसुडीह थाना के वरीय अधिकारी अतिरिक्त पुलिस बल के साथ मामले को शांत कराने और लिखित शिकायत के आधार पर जांच का भरोसा दे रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक कार्रवाई धरातल पर नहीं दिखेगी, वे शांत नहीं बैठेंगे।
