जमशेदपुर: कोल्हान प्रमंडल में गहराते पेट्रोल-डीजल संकट के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लिया है। पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने गुरुवार को एक अनोखे अंदाज में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। वे अपने अन्य नेताओं के साथ साइकिल चलाकर कार्यक्रम स्थल पहुंचे, जो बढ़ती महंगाई और ईंधन की कमी के प्रति विरोध का प्रतीक था।
चुनावी रंग और प्रधानमंत्री का बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कुणाल षाड़ंगी ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके मुद्दे अक्सर ‘चुनावी रंग’ में रंगे होते हैं षाड़ंगी ने कहा कि पांच राज्यों के चुनाव समाप्त होते ही प्रधानमंत्री का रुख बदल गया है। चुनाव से पहले कुछ और वादे होते हैं, जबकि चुनाव के बाद हकीकत कुछ और होती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री एक तरफ देशवासियों को नसीहत दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ खुद उन नियमों का पालन नहीं करते।
आम जनता को नसीहत, खुद के लिए छूट?
जेएमएम प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री द्वारा जनता को दी गई हालिया सलाहों पर कड़ा ऐतराज जताया। पीएम ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, सोना न खरीदने, विदेश न जाने और ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने की अपील की है। षाड़ंगी ने आरोप लगाया कि यह बयान देने के ठीक बाद प्रधानमंत्री ने हजारों समर्थकों के साथ रोड शो किया और अब वे खुद विदेश दौरे पर भी जाने वाले हैं। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री के नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं, उनके अपने लिए नहीं।”
“कथनी और करनी में बड़ा अंतर”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुणाल षाड़ंगी ने कड़े शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का फर्क है और देश की जनता अब इस सच्चाई को जान चुकी है।उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश का आम नागरिक पेट्रोल के लिए घंटों कतारों में खड़ा है, तब केंद्र सरकार समाधान निकालने के बजाय लोगों को ही उपभोग कम करने की सलाह दे रही है।जेएमएम ने मांग की है कि केंद्र सरकार दिखावे की नसीहतें बंद करे और देश में पेट्रोलियम पदार्थों की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करे ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
विरोध का अनोखा तरीका
साइकिल से प्रेस कॉन्फ्रेंस पहुंचने के माध्यम से जेएमएम ने यह संदेश देने की कोशिश की कि यदि ईंधन संकट और महंगाई इसी तरह बढ़ती रही, तो आम आदमी के पास परिवहन के लिए साइकिल ही एकमात्र विकल्प रह जाएगा। इस दौरान पार्टी के कई अन्य स्थानीय नेता भी मौजूद रहे जिन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की।
